Tuesday, March 3, 2026

1014. ट्रम्प जोगीरा

जोगीरा
आपस में ही लड़वाकर के, बेचे खुद हथियार।
युद्ध कराकर नोबेल चाहे,  सामन्ती सरदार।।
जोगीरा सा रा रा रा

पल-पल में ये बोली बदले, बदले अपना भाव।
खुद को तानाशाह समझता, देता टैरिफ ताव।।
जोगीरा सा रा रा रा

अच्छा है ये सनकी अबकी, खत्म करे आतंक।
आतंकी देशों को विषधर, मारे चुन-चुन डंक ।।
जोगीरा सा रा रा रा

सब आतंकी खत्म हुए तो, होगी दुनिया शांत।
शान्ति हेतु युद्ध जरूरी, जबतक हैं आक्रांत।।
जोगीरा सा रा रा रा

जब जब धर्म की हानि होती, होता सबका नाश।
अधर्म हमेशा हार ही जाता, होता स्वयं विनाश।।
जोगीरा सा रा रा रा

खामनई की मौत पे देखो, जश्न मने ईरान।
भारत मे सब छाती पीटे, कैसा है ईमान?
जोगीरा सा रा रा रा

औरों की ख़ातिर क्या कोई, घर में लगाता आग?
अगर शौक का लड़ने का तो, जाओ भारत त्याग।
जोगीरा सा रा रा रा
पंकज प्रियम 
विश्व कल्याण हेतु एकबार में सारे आंतकी नेता और आतंकी देशों का सफ़ाया आवश्यक है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि धर्म और शांति की स्थापना हेतु निर्णायक युद्ध भी आवश्यक है। अगर दुर्योधन बातों से ही मान जाता तो प्रेम के आराध्य कृष्ण को महाभारत क्यूँ रचना पड़ता। कहते हैं न लातों के भूत बातों से नहीं मानते। 

Sunday, March 1, 2026

1013. जोगीरा

दुनियाभर में आग लगाकर,  बनता है सरदार।
आपस में लड़वाये सबको, बेचन को हथियार।
जोगीरा सा रा रा

टैरिफ-टैरिफ खेल रचाकर, करता सबको तंग।
पागल हाथी के जैसे यह, करता है हुड़दंग।।
जोगीरा सा रा रा


मोदी जी ने जाकर बोला, कर दो रेलम रेल। 
खींचातानी बहुत हो गयी, ख़त्म करो अब खेल।।
जोगीरा सा रा रा
पंकज प्रियम
 


Thursday, January 22, 2026

1012.शून्य से शब्द

शून्य से शब्द

चाहता हूँ लिखना
मैं भी बहुत कुछ
पर मन है अशांत उद्विग्न
कुछ जाना, कुछ भिन्न
शून्य में खोजता हूँ
कुछ शब्द कुछ बिम्ब
पर,जाने क्यूँ? 
सूझता नहीं कुछ.
खो गया कहाँ
न जाने अब
अपना ही प्रतिबिम्ब।
चाहता हूँ जोड़ना
रिश्तों को प्यार से
स्नेहिल रेशमी तार से
पर पता नहीं क्यूँ
उलझ जाते हैं
रेत से बिखर जाते हैं
चाहता हूँ खोलना
खुद को उलझे जाल से
अनकहे अनसुने
अनसुलझे जंजाल से
चाहता हूँ जितना 
मैं सुलझना
उतना ही और
उलझा पाता हूँ। 
खोजता हूँ 
स्वयं में स्वयं को
पर खुद को भी
कहाँ ढूंढ़ पाता हूँ।
शब्दों के सागर में
डूबकर भी कहाँ
कुछ लिख पाता हूँ
है कोई ?
जो मुझसे
मिला दे मुझे!
शून्य से शब्द
दिला दे मुझे!

©पंकज प्रियम
22.1.2026

1011.सिस्टम

सिस्टम

फाइलों के जंजाल में,
बाबू मकड़जाल में,
टेबुल सुस्ती चाल में,
        काम अड़ जाता है।

कागजी पड़ताल में,
बेजा के हड़ताल में,
नियम भेड़चाल में,
       सिस्टम सड़ जाता है।

यहाँ-वहाँ चक्कर मे,
घूमे घनचक्कर में,
अहम के टक्कर में,
       खुदे लड़ जाता है। 

सब बने बोली वीर,
हवा में चलावे तीर,
काम जो पड़े तो फिर
          पैर पड़ जाता है।

        ©पंकज प्रियम
22.01.2026