जिस बाप ने तुझको जनम दिया
और पाला पोसा बड़ा किया।
थाम के अँगुली चलना सिखाया
क़दमों पर अपने खड़ा किया।
आज विवश लाचार हुआ तो
हाय! कैसा तुमने कर्म किया?
हाथ उठाकर पिता पे तूने
अरे! कैसा ये अधर्म किया?
तनिक न कांपे हाथ तुम्हारे?
नहीं तुझे क्या शर्म लगी?
जिसने तुझको नाम दिया
संग उसके ही कुकर्म किया।
फ़टी क़मीज़ और फटे ही जूते
खुद ही पहने बाबा ने।
आदमी एकदिन बड़ा बनेगा
देखे सपने बाबा ने।
उन्हें पता क्या बड़ा तू होकर,
उनपे ही हाथ चलाएगा।
जिसने तुझको दुनिया दिखायी
उन्हें ही आँख दिखाएगा?
पंकज प्रियम