राजा का बेटा राजा, किसान का बेटा किसान, फ़िल्म स्टार के बच्चे स्टार, नेता का बेटा नेता, मुख्यमंत्री का बेटा मुख्यमंत्री, डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, इंजीनियर का बेटा इंजीनियर, IAS/IPS के बच्चे भी उसी राह पर चलते हैं तो फिर एक कथावाचक का बेटा कथा क्यों नहीं कर सकता? इससे सबके पेट में दर्द क्यूँ होने लगा है? आरक्षण की सीढ़ी पीढ़ी-दर-पीढी चल सकती है लेकिन एक योग्य बालक अपनी पिता का काम नहीं सम्भाल सकता? मने हद ही कर देते हैं सब ! देवकीनंदन ठाकुर जी का बेटा देवांश किसी का हक तो मारने जा रहा है? कहीं नौकरी के लिए रोना/धोना करने नहीं जा रहा है? उसे व्यासपीठ की गद्दी विरासत में मिली है तो क्या दिक्कत है?
मुसाफ़िर...लफ़्ज़ों का
समंदर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, मुझे खामोश रहने दो, छुपा है इश्क़ का दरिया, उसे खामोश बहने दो। नहीं मशहूर की चाहत, नहीं चाहूँ धनो दौलत- मुसाफ़िर अल्फ़ाज़ों का, मुझे खामोश चलने दो। ©पंकज प्रियम
Thursday, July 2, 2026
१०२१. व्यास का पुत्र व्यास नहीं बन सकता ?
क्या वह अपने घर की व्यास परंपरा को आगे बढ़ाए या उन नौकरियों के लिए मत्था खपाये जहाँ अधिकांश प्रतिभा या तो आरक्षण के तले कुचली जाती है या फिर परीक्षा से पहले ही लाखों करोड़ों में क्वेश्चन लीक होने से हार जाती है।
अरे! बच्चे तो बचपन जो देखते आते हैं वही बनते हैं इसमें गलत क्या है? अगर यही कुछ और करता तो लोग कहते कि दुनिया को प्रवचन देने वाले अपने बच्चों में संस्कार नहीं भर पाये। कुछ समय पूर्व जब डॉ कुमार विश्वास जी ने कहा था कि बच्चों को रामायण की शिक्षा देनी चाहिए नहीं तो घर का नाम रामायण रखने से कुछ नहीं होता तो कई लोगों ने उनके बच्चों के रहन -सहन पर टीका टिप्पणी शुरू कर दी थी कि सबको रामकथा सुनाने वाले अपने बच्चों को संस्कार सिखाओ। धर्म हो, व्यवसाय हो या फिर कोई भी धंधा, पीढ़ियों से आगे बढ़ती जाती है। जितने भी व्यापारी हैं सबके बच्चे व्यापार की करते हैं, नौकरी वालों के बच्चे भी बहुत हद तक अपने अभिभावकों के ही रास्ते चलते हैं।
जाहिर सी बात है कि देवकीनंदन ठाकुर के बेटे देवांश में बचपन से ही कथा प्रवचन के संस्कार पड़े हैं और अगर वह भी अपने पिता की राह पर चल रहा है तो इसमें बुरा क्या है? उसके अंदर प्रतिभा होगी तो अपने पिता से बड़ा कथावाचक बन सकता है. अगर प्रतिभा न हो बड़े बड़े नेता और अभिनेताओं के बच्चों को फ़्लॉप होते देखा है। देवकीनंदन ठाकुर ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर जो आश्रम खड़ा किया है उसे उनका बेटा नहीं तो कौन सम्भालेगा? किसी पर भी ओछी टिप्पणी करने से पहले खुद उसके लायक बन तो जाओ? किसी पर आप एक उँगली उठाते हो तो तीन तुम्हारी ओर ही स्वयं उठती है।
राधे राधे
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