आग
हम तभी जागते हैं जब
लगती है कहीं पे आग
हो जाता है बड़ा हादसा
तब खुलती हमारी आंख
कुछ दिन पड़ताल चलेगी
कुछ दिन हो हल्ला होगा
घोषणा मुआवजा सरकारी
फिर वही चढ़ जाएगी
सबकी आंखों में पट्टी
अखबारों में विज्ञापन की
जिम्मेवारों में रिश्वत की
सब सोये रहेंगे तबतक
जब तलक फिर कोई
हो नहीं जाएगा हादसा।
नहीं किसी की जिम्मेवारी
नही देखता कोई अधिकारी।
उनका क्या? जिनकी
गोद हो गयी सूनी
जिनके घर का बुझा चिराग
लग गयी सपनो में ही आग।
पंकज प्रियम
साहित्योदय