जोगीरा
आपस में ही लड़वाकर के, बेचे खुद हथियार।
युद्ध कराकर नोबेल चाहे, सामन्ती सरदार।।
जोगीरा सा रा रा रा
पल-पल में ये बोली बदले, बदले अपना भाव।
खुद को तानाशाह समझता, देता टैरिफ ताव।।
जोगीरा सा रा रा रा
अच्छा है ये सनकी अबकी, खत्म करे आतंक।
आतंकी देशों को विषधर, मारे चुन-चुन डंक ।।
जोगीरा सा रा रा रा
सब आतंकी खत्म हुए तो, होगी दुनिया शांत।
शान्ति हेतु युद्ध जरूरी, जबतक हैं आक्रांत।।
जोगीरा सा रा रा रा
जब जब धर्म की हानि होती, होता सबका नाश।
अधर्म हमेशा हार ही जाता, होता स्वयं विनाश।।
जोगीरा सा रा रा रा
खामनई की मौत पे देखो, जश्न मने ईरान।
भारत मे सब छाती पीटे, कैसा है ईमान?
जोगीरा सा रा रा रा
औरों की ख़ातिर क्या कोई, घर में लगाता आग?
अगर शौक का लड़ने का तो, जाओ भारत त्याग।
जोगीरा सा रा रा रा
पंकज प्रियम
विश्व कल्याण हेतु एकबार में सारे आंतकी नेता और आतंकी देशों का सफ़ाया आवश्यक है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि धर्म और शांति की स्थापना हेतु निर्णायक युद्ध भी आवश्यक है। अगर दुर्योधन बातों से ही मान जाता तो प्रेम के आराध्य कृष्ण को महाभारत क्यूँ रचना पड़ता। कहते हैं न लातों के भूत बातों से नहीं मानते।
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