ज़िन्दगी का हो सफ़र या, मौत-जीवन जंग हो।
हार में क्या? जीत में क्या?
प्रेम में क्या? प्रीत में क्या?
मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम