Tuesday, April 10, 2018

रंग पे बवाल

रंग पे बवाल
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देश मे फिर से बवाल हो गया
मूर्ति के रंग पे बवाल हो गया।
बाबा भीमराव की कमीज पर
रंग सियासी भूचाल मच गया।

एक ने कर दिया  क्या भगवा
तो उसपर ही सवाल हो गया।
दूजे ने रंग दिया कोर्ट नीला
तो  सियासी बवाल हो गया।

क्या फर्क पड़ता है बाबा को
भगवा हो या रंग कोर्ट नीला
कैसे बदलोगे रंग फूल गेंदे का
जो खुद बाबा के गले से मिला।

छोड़ दो नफरतों की सियासत
बदल दो राजनीति की रवायत
देश को बांटने की नहीं जरूरत
हर दिल कर उठेगा फिर बगावत।

सम्मान दिल से करो तुम जरा
सियासी रंगों से न हमको डरा
मूर्तियों से सम्मान मिलता नही
उनकी बातों पे चलो तुम जरा।

कपड़े का रंग तो बदल दोगे
पर बहती रगों का क्या करोगे
लहू का नही,कोई मजहब होता।
दिल धड़कने से मतलब होता।

रंगों का भी यहां मजहब हो गया
कोई हिन्दू,कोई मुस्लिम हो गया
अब नीले पर भी सवाल हो गया
सियासी रंगों से बवाल हो गया।
©पंकज प्रियम
10.4.2018