Monday, May 7, 2018

320.नींद

नींद

ख्वाबों में तुझे खोया हूँ जबसे
नींद से नहीं सोया हूँ मैं तबसे।

बहुत ढूंढा तुझे ख्यालों में जाके
उड़ी है नींद मेरी आँखों मे तबसे।

खुली आँखों से ख्वाब जो बिखरे
नींद से फासला कर लिया तबसे।

नींद का रिश्ता रहा मेरे दिल से
तेरे संग वो भी बेवफ़ा हुई तबसे।

तेरी यादों से जो नाता जोड़ा हमने
नींद ने तोड़ लिया है रिश्ता तबसे।

यादों के सफ़र,जो निकले प्रियम
आखिरी नींद बनी मंजिल तबसे।

©पंकज प्रियम
7.5.2018