सिस्टम
फाइलों के जंजाल में,
बाबू मकड़जाल में,
टेबुल सुस्ती चाल में,
काम अड़ जाता है।
कागजी पड़ताल में,
बेजा के हड़ताल में,
नियम भेड़चाल में,
सिस्टम सड़ जाता है।
यहाँ-वहाँ चक्कर मे,
घूमे घनचक्कर में,
अहम के टक्कर में,
खुदे लड़ जाता है।
सब बने बोली वीर,
हवा में चलावे तीर,
काम जो पड़े तो फिर
पैर पड़ जाता है।
©पंकज प्रियम