मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
निकल आओ घरों से अब, हमें सबको जगाना है.
हमारी वोट की ताकत, सकल जग को दिखाना है.
मिला अधिकार है हमको, नया निर्माण करने को -
सही मतदान अब कर लो, नहीं इसको गंवाना है..
पंकज प्रियम