श्याम कहो घनश्याम कहो तुम, कृष्ण मनोहर रास बिहारी।
नंद यहाँ अवतार लियो अरु, गोकुल जा कर गोप मुरारी।
नाम अनेक पुराण कथा सब, कृष्ण नचावत सृष्टि ये सारी।
कृष्ण हजार हृदय में विराजत, कृष्ण समाहित राधा प्यारी।।
©पंकज प्रियम
मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
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Saturday, August 24, 2019
631. राधेश्याम
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