मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
Tuesday, April 17, 2018
गैंगरेप
"गैंगरेप:धर्म का दुष्कर्म", को प्रतिलिपि पर पढ़ें :
http://hindi.pratilipi.com/story/%E0%A4%97%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AA-TcbRcF1RfVsG?utm_source=android&utm_campaign=content_share
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