Thursday, July 11, 2024

995.महंगाई

महंगाई

आलू को बुखार चढ़ा,
      टमाटर लाल हुआ।
            हरी मिर्च हरजाई,
                धनिया धमाल है।

दाल-रोटी नून प्याज,
    महंगा है सब आज।
       रसोई में आग लगी,
              बड़ा बुरा हाल है।
            
गिर गया पैसा पर
    चढ़ गयी महंगाई।
       आग लगी तरकारी,
           सौ के पार दाल है।

घट गई रोजगारी,
   बढ़ गयी है बेकारी
        घर-घर बदहाली,
              जनता बेहाल है। 
©पंकज प्रियम

1 comment:

Admin said...

यह कविता पढ़ते ही रसोई का पूरा सच सामने आ जाता है। आप आलू, टमाटर और मिर्च के बहाने महंगाई की चुभन सीधी दिल तक पहुँचा देते हैं। मैं हर पंक्ति में आम आदमी की थाली को सिकुड़ते देखता हूँ।