मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
शारदे माता सरस्वती, चरण नवाऊं शीश।
भारती वीणावादिनी, दे मुझको आशीष।
रुके न मेरी लेखनी, दो इतना वरदान।
सबकी पीड़ा हर सकूँ, करूँ जगत कल्याण।
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