मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
नाथ कहो शिवनाथ कहो तुम, बमबम भोलेशंकर प्यारे। गङ्गजटाधर चन्द्र सुशोभित, सर्प सजाये तन में सारे।। हाथ त्रिशूल सुसज्जित डमरू, नन्दी बैल चढ़े त्रिपुरारे। भक्तन को मझधार उबारत, दुष्टन को खुदनाथ सँहारे।।
© पंकज प्रियम
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