मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
उठो जागो चलो तबतक, मिले मंज़िल नहीं जबतक, कदम पे तुम भरोसा रख, सफ़र बैसाखियाँ कबतक। कभी जो जंग हो मन में, सदा दिल को सुनो लेकिन- नहीं कोई जीत पाता है, दिलों में द्वेष हो तबतक।। ©पंकज प्रियम स्वामी विवेकानंद जी जयंती पर शत शत नमन
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