समंदर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, मुझे खामोश रहने दो, छुपा है इश्क़ का दरिया, उसे खामोश बहने दो। नहीं मशहूर की चाहत, नहीं चाहूँ धनो दौलत- मुसाफ़िर अल्फ़ाज़ों का, मुझे खामोश चलने दो। ©पंकज प्रियम
Monday, July 27, 2020
861. तुलसीदास
Tuesday, July 21, 2020
860. छनन छन छन
859. हम समर्थ
Sunday, July 19, 2020
858. सावन मनभावन
Friday, July 17, 2020
857.मनभावन सावन
सावन-सावन मनभावन सावन
आजा-आजा अब घर में साजन।
सावन-सावन मनभावन सावन।
बरसे बादल फिर मेरे आँगन।
टिप-टिप बूंदो के संग देखो-
नाची बरखा फिर मेरे आँगन।।
बमभोले का है मास ये पावन,
झूला झूले संग राधा मोहन।
घनघोर घटा हो छायी अम्बर-
मोर पपीहा तब नाचे कानन।।
वसुधा-अम्बर का रोज मिलन,
भीगी बरखा तन आग लगावन।
चमक बिजुरिया उर मारे ख़ंजर-
आजा-आजा अब तो साजन।।
चूड़ी बिंदिया ये काजल कंगन,
काया कंचन ये कुमकुम चन्दन।
कुछ भी मुझको रास न आये-
सूना-सूना यह लगता आँगन।।
©पंकज प्रियम
Wednesday, July 15, 2020
856. शिव
नाथ कहो शिवनाथ कहो तुम, बमबम भोलेशंकर प्यारे।
गङ्गजटाधर चन्द्र सुशोभित, सर्प सजाये तन में सारे।।
हाथ त्रिशूल सुसज्जित डमरू, नन्दी बैल चढ़े त्रिपुरारे।
भक्तन को मझधार उबारत, दुष्टन को खुदनाथ सँहारे।।
© पंकज प्रियम