Tuesday, September 1, 2020

871. व्यापार लाशों का

 यहाँ जिंदा मरा है सब,  सजा बाज़ार लाशों का,

विचारों पे लगा पहरा, दिखे अख़बार लाशों का।

यकीं किसपे करे कोई, भरोसा हो भला किसपर-

धरा का देवता करता, यहाँ व्यापार लाशों का।।


©पंकज प्रियम

1 comment:

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा said...

बहुत ही सटीक लिखा है आपने।