मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
तेरे ख्वाबों में हम खोते तेरी आँखों में हम सोते आज के न हम यूँ रोते काश! के तुम मेरे होते-2
हम तुम दोनों घर बनाते चाँद सितारों से सजाते आज के न हम दो होते काश! के तुम मेरे होते।-2
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