Friday, January 11, 2019

505.हे राम!तुम्हें आना होगा


हे राम तुम्हें फिर आना होगा।
खुद अधिकार जताना होगा।
नहीं मिलेगा इंसाफ तुम्हें भी
खुद हथियार उठाना होगा।

याद है वो सागर की ढिठाई
पूजा-प्रार्थना काम न आयी
जब कुपित हो उठाया बाण
खुद सागर ने थी राह दिखाई।
वही रूप तुम्हें दिखाना होगा
हे राम तुम्हें फिर आना होगा।

अब मर्यादा सब छोड़ो तुम
घर से नाता अब जोड़ो तुम
बहुत हो गया केस मुकदमा
शिव-धनुष अब तोड़ो तुम।
क्रोध परशुराम जगाना होगा
हे राम तुम्हें फिर आना होगा।
कोर्ट की तारीख़ों के चक्कर।
जनता पीस जाती है अक्सर।
तुम तो हो मर्यादा पुरुषोत्तम,
बन जाओगे तुम घनचक्कर।
खुद अब इंसाफ़ सुनाना होगा
हे राम तुम्हें अब आना होगा।
जीव जानवर हाथ मिलाए
सब असुरों को मार भगाए
जीत कर भी सोने की लंका
तुम अवध में लौटकर आये।
फिर वही जीत दुहराना होगा
हे राम तुम्हें फिर आना होगा।
जिस घर में तुमने जन्म लिया
दशरथ को तुमने धन्य किया
किलकारी जिसमें गूँजी थी
जिस घर में सबने पुण्य किया
फिर मन्दिर वहीं बनाना होगा।
हे राम तुम्हें फिर आना होगा।
©पंकज प्रियम
10.1.2018

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