Thursday, January 3, 2019

499.मुहब्वत की सज़ा

रूह में समा दीजिये

हुश्न को इश्क़ से मिला दीजिये
मुहब्बत आंखों से पिला दीजिये।

महक उठे खुशबू से चमन सारा
चाहतों के फूल यूँ खिला दीजिये।

छोड़िए दुश्मनी की वजह सारी
दिल को दोस्ती से मज़ा दीजिये।

आपकी गिरफ्त में गुजरे जिंदगी
मुहब्बत की ऐसी सज़ा दीजिये।

मिट जाए प्रियम का वजूद सारा
अपनी रूह में ऐसे समा दीजिये।

©पंकज प्रियम

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