मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
लिखा इतिहास फिर देखो, किया जो खास सिंधू ने, हरा जापान नोजोमी,........ रचा इतिहास सिंधू ने। कभी तुम बोझ ना समझो,.. इसे ना कोख में मारो- सुखद वरदान है बेटी........दिया अहसास सिंधू ने।। ©पंकज प्रियम
Post a Comment
No comments:
Post a Comment