Friday, January 12, 2018

न्यू इंडिया की गाथा सुनाते हैं ^^^^^^^^^^^^^^^^

न्यू इंडिया की गाथा सुनाते हैं
^^^^^^^^^^^^^^^^


^^^^^^^
आओ भारत
तुम्हे तुम्हारी
नई तस्वीर दिखाते हैं
ठंड से ठिठुरते
भूख से मरते
न्यू इंडिया की
विकास गाथा सुनाते हैं।
कुत्तों को मिलता
दूध बिस्किट गहना
मखमली स्वेटर पहना
फरारी में सैर कराते हैं।
भूख से बिलखते
गरीब के बच्चे
कचरों से चुन
फेंका निवाला खाते हैं।
अखबारों में लिपट सिमट
पूस की रात भी ठंड में
सिकुड़, बीच सड़क सो जाते हैं।
खूब हो रही विकास की बातें
रोजगार सृजन समृद्धि की बातें
लेकिन किसान फांसी में झूल जाते हैं।
अच्छे दिन का था ख्वाब दिखाया
पर हाय!ये कैसा दिन है आया
आसमान छूती डायन मंहगाई
चूल्हे चौके पर है आफत आयी
पेट्रोल डीजल दुगुने दाम भरवाते हैं
फिर भी खूब सारे टैक्स चुकाते है।
जाति मजहब की लड़ाई
धर्म मे लड़ते भाई भाई
अपने ही अपनों का खून बहाते हैं।
छूट रहे हैं बड़े नेता भ्रस्टाचारी
नाबालिक हो जाते बलात्कारी
कोर्ट में पिसती जनता बेचारी
न्याय के दर आते चप्पल घिस जाते हैं
बड़े अपराधी बाइज्जत बरी हो जाते हैं।
जाति धर्म दीन दलित का नारा
अल्पसंख्यक वोट बैंक तुम्हारा
यही सियासत करते यूँ साल गुजर जाते हैं
हाथ जोड़ फिर नेता जनता को ठग जाते हैं।
अनाज है गोदाम में सड़ता
लेकिन गरीब है भूखे मरता
सेल्फी खींच खिंच कम्बल बंटवाते है
और गरीब बेचारे ठंड से मर जाते हैं।
दिखता नही विकास कहीं
लगता है परिहास यही
वो हैं कि विकास विकास चिल्लाते हैं।
आओ भारत तुम्हे तुम्हारी
न्यू इंडिया की गाथा सुनाते हैं।
पाकिस्तान है आंख दिखाता
चीन को भी तू नही सुहाता
दिल रोता नही क्या तुम्हारा
जब अपने भी उनके साथ खड़े हो जाते हैं
दुश्मनों की औकात नही
उनमे वो कोई बात नही
जो काम अपने देश के गद्दार कर जाते हैं।
आओ भारत तुम्हे तुम्हारी
न्यू इंडिया की तस्वीर दिखाते हैं।
        ©पंकज भूषण पाठक"प्रियम"
           11.01.2018

No comments: