मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
मौत के इस मंजर में, आओ एक उम्मीद जगायें, मन का तिमिर मिटाने को आओ एक दीप जलायें। बहुत घनेरा तमस है फैला, कोरोना के साये में- जग से इसका खौफ़ मिटाने, आओ एक दीप जलायें।।
©पंकज प्रियम
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