Tuesday, November 19, 2024

1004. पुरुष भी रोते हैं

कौन कहता है कि, मर्द रोते नहीं।
रोते तो हैं मगर आँसू बहाते नहीं।

पुरुषों का हृदय कोई पत्थर का नहीं होता
वहाँ भी धड़कती है एक जान किसी के लिये
एक पुरूष केवल पुरूष ही नहीं होता
होता है एक माँ का दुलारा, बाप का प्यारा
एक पत्नी का संसार और बच्चों का सहारा।
घर परिवार से बाहर दुनिया और समाज
माथे पर जिम्मेवारियों का कँटीला ताज
पुरूष भी रोता और सिसकता है
आंसुओं के बाढ़ को रोक लेता है
उसकी भी आँखे होती है नम
पी जाता है अंदर ही सारे गम।
बूढ़े माँ-बाप कहीं कमजोर न पड़ जाएं
बीवी-बच्चे कहीं उदास न हो जाएं।
इसलिए आँसुओ को दबाना पड़ता है।
चेहरे पर लाकर झूठी -सी मुस्कान
दिल में हर गम को छुपाना पड़ता है। 
पुरूष तब रोता है जब वह तन्हा होता है
जीवन के भँवर में जब खुद को खोता है।
अकेले ही सारी दुनिया का बोझ ढोता है।
हाँ पुरूष भी अंदर-अंदर खूब रोता है। 

पुरुष दिवस की बधाई।
कवि पंकज प्रियम

Saturday, November 2, 2024

1003. खोना पड़ता है

रातों की नींद, दिन का सुकून खोना पड़ता है।
घर-परिवार, सुख-चैन से दूर होना पड़ता है।
फ़क़त पत्थर फैंकने से फल नहीं मिल जाता-
दिनरात पसीना बहाकर बीज बोना पड़ता है।।

ये मत सोच कि धरा ने तुमको दिया क्या है?
जरा सोच, धरा के लिए तुमने  किया क्या है?
ये जननी तो सबको समान अवसर देती है-
ये तो अपना कर्म है कि उससे लिया क्या है?

माँ और मिट्टी कहाँ बच्चों से हिसाब लेती है?
जो कुछ भी है सबकुछ तो बेहिसाब देती है।
ये बच्चों की नादानी है जो फ़र्क मान बैठते-
माँ का आँचल को आनंदमयी रमणरेती है।

फ़टी चादर को क्या तलवार से सिया जाता है?
अपनों से क्या रिश्तों का हिसाब लिया जाता है?
मिलना न मिलना सब तय है उसके बहीखाते में-
फल तो वही मिलता है जो कर्म किया जाता है।।

प्रियमवाणी
©पङ्कज प्रियम

Wednesday, October 30, 2024

1002.आओ ज्योति पर्व मनायें

आओ ज्योति पर्व

मन से ईर्ष्या द्वेष मिटाकर, 
नफरत का हर भेष मिटाकर।
प्रेम भाव सन्देश जगाकर, 
               सत्य सनातन दीप जलाएं
                आओ ज्योति पर्व मनाएं।

अंधकार पर प्रकाश की,
अज्ञानता पर ज्ञान आस की।
असत्य पर सत्य की,
              पुनः एक जीत दुहरायें,
              आओ ज्योति पर्व मनाएं।

भूखा -प्यासा हो अगर,
बेबस लाचार ललचाई नज़र। 
उम्मीद जगे तुमसे इस कदर, 
           कि दर्द में मरहम लेप लगायें,
               आओ ज्योति पर्व मनाएं।

अन्याय से ये समाज, 
प्रदूषण-दोहन से धरा आज ।
असह्य वेदना से रही कराह
        इस दर्द की हम दवा बन जायें,
              आओ ज्योति पर्व मनाएं।

भय आतंक -वितृष्णा बुझाकर
बुझती नजरो में आस जगाकर।
जाति-मज़हब का भेद मिटाकर
                अमन-चैन के फूल खिलायें,
                   आओ ज्योति पर्व मनाएं।

चहुँओर प्रीत की रीत जगाकर,
निर्मल निश्छल गीत बनाकर।
निर्झर का संगीत सजाकर,
               मन से मन का मीत बनायें
               आओ ज्योति पर्व मनाएं।
               आओ ज्योति पर्व मनाएं।
©पंकज प्रियम
#Diwali #दीपावली #bharat #indian #sanatandharma #sanatani साहित्योदय

Thursday, October 24, 2024

1001. गैया माता (आरती)

ॐ जय गैया माता, मैया जय गैया माता।
दूध दही घृत माखन, घर-घर सुख दाता। ॐ जय-

तुम हो गौंवत्री पयस्विनी, तुम हो सुधा दाता।
 ओ मैया तुम हो सुधा दाता।
गौरी, धेनु, सुरभी, भद्रा हिंदमाता। ॐ जय गैया माता।

तुम हो कान्हा प्यारी, कपिला गिरिजा गीता। 
ओ मैया कपिला गिरिजा गीता।
तुम्हरे चरण जिस घर में, धन बैभव आता। ॐ जय गैया माता। 

गौतमी गोमती श्यामा, वैष्णवी मङ्गला गौमाता। ओ मैया वैष्णवी मङ्गला गौमाता।
नंदिनी भारती कृष्णा, रजता, मनसा तृप्ता। ॐ जय गैया माता

गोपेश्वरी कल्याणी, संध्या, ज्वाला, ललिता। 
ओ मैया सन्ध्या ज्वाला ललिता। 
पंचगव्य तुमसे ही, पूर्णा, भक्ति, त्वरिता। ॐ जय गैया माता। 

गोबर ऊर्जादायक, गोमूत्र अमरदाता। ओ मैया गोमूत्र अमरदाता। 
रोग प्रतिरोध क्षमता, अमृता कहलाता। ॐ जय गैया माता। 

गौसेवा फलदायी, सुख सन्तति करता। ओ मैया सुख सन्तति करता।
जिस घर में तुम रहती, क्लेश नहीं टिकता। ॐ जय गैया माता।

निशदिन आरती जो कोई, प्रेम सहित गाता। ओ मैया प्रेम सहित गाता।
कहत प्रियम सुन साधो, संकट मिट जाता। ॐ जय गैया माता। 

ॐ जय गैया माता, मैया जय गैया माता। 
दूध दही घृत माखन, घर-घर सुखदाता। ॐ जय गैया माता।
©®पंकज प्रियम

Sunday, October 20, 2024

1000. शिवायन

*दोहा*
जन रामायण पूर्ण कर, कृष्णायन का नाम।
मातुपिता आशीष से, किया शिवायन काम।।

भोलेशंकर की कथा, आदि अनादि अशेष। 
प्रियम समर्पित साधना, ग्रंथ शिवायन भेष।। 2

*चौपाई*
शिवशक्ति की महिमा न्यारी। ग्रंथ शिवायन गाथा प्यारी।।1
अद्भुत अनुपम रचना प्यारी। सत्य सनातन महिमा न्यारी।। 2
कण-कण भारत काव्य बना है। सबके मन का भाव सना है।।3
शिव का वर्णन सरल कहाँ है।
कण भर कोशिश हुई यहाँ है।।4
सत्य स्वरूप शिवायन सुंदर।  स्थापित हो यह घर के अंदर।।5
सबने पूरी की है निष्ठा।वेद ग्रन्थ सी मिले प्रतिष्ठा।। 6
हर दिन पूजन करे जो इसका। पूर्ण मनोरथ हो सब उसका।। 7 
ग्रन्थ शिवायन शिव को अर्पण। 
करे प्रियम निज भाव समर्पण।।8

*दोहा* 
शिव शक्ति के प्रेम का, अद्भुत हुआ बखान। 
सत्य शिवायन साधना, बने सुग्रन्थ महान।। 3

*चौपाई*
आदिशक्ति की प्रीत पुनीता। जनम-जनम में रही विनीता।। 9
बमभोले की है वो प्यारी। मातु भवानी महिमा न्यारी।। 10
शिवशक्ति का रूप मनोरम। पुरूष प्रकृति का है संगम।। 11
जग कल्याण के हेतु हरदम। त्याग समर्पण करते बमबम।।12
व्याघ्रछाल नरमुण्ड की माला, कण्ठ सुशोभित करते हाला।।13
जटाजूट से गङ्गा धारा। भाल सुशोभित चंदा न्यारा ।। 14
भस्म लपेटे तन में सारे। कानन-कुण्डल बिच्छू प्यारे।।15
डम-डम डमरू नाद भयंकर, ले त्रिशूल ताण्डव कर शंकर।। 16
दानव-मानव सबके प्यारे। बमभोले हैं जगत दुलारे।।17
भेदभाव से परे हैं शंकर। अभयदान देते अभ्यंकर।। 18
सहज सरल हैं बमबम बोले। बेल-धतूरे से मन डोले।। 19
पूजा जपतप ध्यान जरूरी। मनोकामना करते पूरी ।। 20

 *दोहा*
सत्य साधना से सृजित, पूर्ण मनोरम काम।
शिव को समर्पित ग्रन्थ ये, रचा शिवायन नाम।।4

*चौपाई*
पन्द्रह सर्गो में संपादित। दो खण्डों में है ये सर्जित।। 21
प्रथम खण्ड में गाथा सुंदर। द्वितीय खण्ड में युद्ध भयंकर।। 22
डेढ़ शतक कवियों ने मिलकर। किया सृजन यह ग्रन्थ मनोहर।।23
ग्रन्थ शिवायन काव्य महातम। सकल जगत में है यह उत्तम।।24
नितदिन जो भी पाठ करे वो। कभी काल से नहीं डरे वो ।। 25
काल अकाल निकट नहि आवै। मोक्ष प्राप्त कर शिव को पावे।। 26
कहे प्रियम यह ध्यान लगाकर। तृप्त हुआ मन ग्रन्थ को पाकर।। 27
शिवशक्ति की गाथा पावन। सत्य साधना ग्रंथ शिवायन।। 28

दोहा- 
भोलेशंकर की कृपा, मिला अम्ब वरदान।
ईश्वर के आशीष से, पूर्ण हुआ अवदान।।

  
पंकज प्रियम

999. शिव का मन

शिव का अंतर्मन
कैसे तुझे बताऊं गौरा, क्या कहता है मेरा मन।
सबने देखा तन के बाहर, देख न पाया अंतर्मन।

काल का देव बनाया हमको, महाकाल सब कहते।
जग संहारक नाम दिया और मुझसे सब हैं डरते।
जग कल्याण के हेतु हरदम, हमने खुशियां त्यागी।
भोग विलास से दूर रहे हम, ध्यान योग वैरागी।
चिताभस्म में धूनी रमाये, व्याघ्रचर्म है मेरा वसन।
सबने देखा मृत्यु ताण्डव, देख न पाया सन्तुलन।
सबने देखा तन के बाहर, देख न पाया अंतर्मन।

सागर के मंथन में अमृत, सब देवों ने पान किया।
देवता दानव सबने अपने, हिस्से धन का खान किया।
कालकूट का विष फैला तो, सबने मेरे नाम किया।
मेरे भक्तों ने ही मुझको, आज यहां बदनाम किया। 
गांजा फूँके भांग को पीते, मेरे नाम पे मद सेवन।
सबने हलाहल पीते देखा, देख न पाया मन क्रंदन।

कैसे तुझे बताऊं गौरा, क्या कहता है मेरा मन।
सबने देखा तन के बाहर, देख न पाया अंतर्मन।
पंकज प्रियम

Monday, September 16, 2024

998. मंज़िल

मंजिले मिलती उन्हीं को, जो समय के संग हो। 
ज़िन्दगी का हो सफ़र या, मौत-जीवन जंग हो।

हार में क्या? जीत में क्या?
प्रेम में क्या? प्रीत में क्या?

997. ज़िन्दगी बहार लगती है

ज़िन्दगी
ज़िन्दगी यार बड़ी, खुशगवार लगती है,
इश्क़ का फूल खिलाती, बहार लगती है।
पास आकर के कभी मौत मुस्कराये तो-
ज़िन्दगी धूप में ठंडी,  बयार लगती है।।
पंकज प्रियम 
16.09.2024

Saturday, August 24, 2024

996.महाकाल

नाथ कहो शिवनाथ कहो तुम, बमबम भोलेशंकर प्यारे।

गङ्गजटाधर चन्द्र सुशोभित, सर्प सजाये तन में सारे।।

हाथ त्रिशूल सुसज्जित डमरू, नन्दी बैल चढ़े त्रिपुरारे।

भक्तन को मझधार उबारत, दुष्टन को खुद नाथ सँहारे।।

पकड़ के हाथ वो सबका, भँवर से पार भी करते,
हमारे नाथ बम भोले,.... सभी से प्यार भी करते।
ज़हर पीकर हलाहल वो, सदाशिव बन गए शंकर-
करे कल्याण वे जग का, वही संहार भी करते।।

हे महाकाल, हे शिवशम्भु
हे भोलेनाथ, हे विश्वगुरू।
जगतनियन्ता, प्रतिपालक
हे बैद्यनाथ,  कैलाशपति।
चिता भस्म हैं धूनी रमाये
सकल चराचर तुम्हीं समाए।

हे गंगाधर, हे शिवशंकर
हे जटाधर, हे कृपानिधि।
नीललोहित,  वामदेव,
हे त्रिपुरांतक, प्रजापति।
विश्व मनोरम तुम्हीं बसाए
सकल.....।

हे महादेव, हे व्योमकेश
हे मृत्युंजय, हे भूतपति।
चारुविक्रम, सूक्ष्मतनु
हे प्रथमाधिप, उमापति।
जगत मनोरथ, मन हरषाए।
सकल....।

हे पिनाकी, हे कपाली
हे कामारी, हे मृगपाणी
भुजंगभूषण, सुरसूदन
हे शिवाप्रिय, भूतपति।
दानव मानव शीश झुकाए।
सकल....।
©पंकज प्रियम

Thursday, July 11, 2024

995.महंगाई

महंगाई

आलू को बुखार चढ़ा,
      टमाटर लाल हुआ।
            हरी मिर्च हरजाई,
                धनिया धमाल है।

दाल-रोटी नून प्याज,
    महंगा है सब आज।
       रसोई में आग लगी,
              बड़ा बुरा हाल है।
            
गिर गया पैसा पर
    चढ़ गयी महंगाई।
       आग लगी तरकारी,
           सौ के पार दाल है।

घट गई रोजगारी,
   बढ़ गयी है बेकारी
        घर-घर बदहाली,
              जनता बेहाल है। 
©पंकज प्रियम

Thursday, June 6, 2024

994.चुनाव जाल में फंसती जनता

चुनावी जाल में फँसते आम वोटर

जाति मज़हब जीते सब,
गया हिंदु बस हार। 
फ्री पैसे के लोभ में, दिया काम दुत्कार।
पंकज प्रियम
नेताओं की धूर्तबाजी और चालाकी में भोली भाली जनता फंस जाती है। निश्चित तौर पर ये धूर्तबाजी सभी अशिक्षित वर्गो पर की गई और वोट लेने के लिए 1 लाख रुपये की गारंटी कार्ड तक दे दी गयी। उन्हें यह नहीं बताया गया कि कोंग्रेस की सरकार बनने पर 1 लाख सलाना दिए जाएंगे वल्कि यह बताया गया होगा कि इंडि गठबंधन को वोट दीजिये और हर महीने आपके खाते में पैसा आने लगेगा तभी तो बंगलुरु में चुनाव के पहले खाता खुलवाने मुस्लिम महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। चुनाव खत्म होते उन्हें लगा कि अब तो उनके खाते में पैसे आ जाएंगे और इसीलिए औरतें कोंग्रेस दफ्तर में पहुँचने लगी। इन दलों ने शुरू से ही मुस्लिम, दलित और पिछते अशिक्षित वर्ग को वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल करने का पाप किया है। अगर ये महिलाएं शिक्षित होती तो निश्चित तौर पर उन्हें यह पता होता कि यह महज चुनावी भाषण था।
वैसे भी देश की हर महिला को 1 लाख रुपये सलाना देना व्यवहारिक नहीं है। आखिर कहाँ से कोई सरकार इतने रुपये फ्री में देगी? सरकार कोई भी चीज फ्री में नहीं देती है उसकी वसूली आम जनता से ही टैक्स के जरिये करती है। देश की बहुसंख्यक आबादी अपनी मेहनत की कमाई को टैक्स ले रूप में सरकार को देती है और सरकार उसे अपनी राजनीतिक लाभ के लिए रेबड़िओं की तरह मुफ्त में बांटने का काम करती है। अगर फ्री में ही देना है तो विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री अपनी निजी संपत्ति से दे इसमें किसी को कोई ऐतराज नहीं है लेकिन मध्यमवर्गीय परिवार की मेहनत की कमाई को फ्री में लुटाने का अधिकार किसी सरकार को नहीं है। 

  चुनाव के वक्त पैसे और शराब बांटने का काम लगभग हर पार्टी करती है। वोट के बदले नोट के लालच में समाज के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग आसानी से फंस जाते हैं और राजनीतिक दल उन्हें अपना वोट बैंक बनाते रहे हैं। वे सही गलत का चुनाव नहीं कर पाते उन्हें समाज के कुछ ठेकेदार जैसे हांकते हैं उसी तरफ हो लेते हैं जबकि अगड़े और शिक्षित वर्गो का वोट बिखरा रहता है, एक ही घर में 4 अलग विचारधारा के लोग रहते हैं। यही कारण है कि राजनीतिक दलों के लिए पहले अल्पसंख्यक वर्ग वोटबैंक था अब धीरे-धीरे उन्होंने बहुसंख्यक आबादी को जातियो में विभाजित कर दलितों को वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं। मौजूदा लोकसभा चुनाव परिणाम को ही देख लीजिए । अल्पसंख्यक, दलित, ओबीसी वर्ग में एकमुश्त एकतरफा वोट दिया क्योंकि उन्हें 1 लाख सलाना का लालच और आरक्षण खत्म करने का डर दिखाया गया। जबकि भाजपा के पारंपरिक वोटर अगड़े और शिक्षित वर्ग वोट देने भी नहीं निकले उन्हें लग रहा था कि भाजपा तो प्रचण्ड जीत की ओर बढ़ ही रही है। प्रधानमंत्री के 400 पार नारे ने भी भाजपा के वोटरों को अलसी बना दिया यही वजह रही कि मुस्लिम बहुल इलाकों में तो बम्पर वोटिंग हुई लेकिन हिन्दू बहुल इलाकों में लोग बाहर नहीं निकले। इसमे कोई दो राय नहीं कि मोदी सरकार के पिछले 10 वर्षों में अभूतपूर्व और अप्रत्याशित कार्य हुए हैं। सड़क, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास हर क्षेत्र में काम हुए हैं। मोदी सरकार में  सरकारी कामकाज की परिभाषा बदल गई। प्राइवेट सेक्टर की तरह ही सरकारी विभागों में टारगेट बेस्ड कार्य हो रहे हैं। छुट्टी और रविवार तो जैसे सरकारी कर्मचारी भूल ही गये हैं। घर आने के बाद भी देर रात तक सबको काम करना पड़ रहा है। सबको मिशन मोड में काम करना पड़ता है। यही वजह है कि मोदी सरकार से सरकारी कमर्चारी का एक बड़ा वर्ग नाराज भी है क्योंकि पहले की सरकारों में उनके लिए कोई काम ही नहीं था। हर घर जल, स्वच्छ भारत मिशन, आवास में सबको शुद्ध पेयजल, शौचालय और पक्के मकान मिल रहे हैं। कोरोना काल से प्रत्येक परिवार में हर सदस्य को 5 किलो मुफ्त अनाज दिए जा रहे हैं आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि इसका लाभ किस वर्ग को ज्यादा मिल रहा है। हिन्दू गरीब परिवारों में मुश्किल से 3 या 4 सदस्य होते हैं तो कुल जमा 20 किलो अनाज उन्हें मिलता है जबकि एक मुस्लिम परिवार में 15-20 सदस्य होते हैं तो उन्हें हर माह 1 क्विंटल मुफ्त अनाज मिल रहा है। उसी तरह हर परिवार को शौचालय और आवास मुफ्त में मिल रहा है। इन योजनाओं से लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जुड़े हुए हैं। गॉंव -गाँव में बिजली, पानी और सड़क की सुविधा मिल रही है। मैं अपने ही गाँव को देखता हूँ कि 15-17 वर्ष पहले एक अदद सड़क तक नहीं थी कोई रिक्शा वाला भी जाने को तैयार नहीं होता था आज हाइवे बन गया है और 24 घण्टे गाड़ियां चलती है। 24 घण्टे बिजली मिल रही है। आज से 15 साल पहले किसी के घर मे एक मोटरसाइकिल तक नहीं थी लेकिन मोटरसाइकिल छोड़िये अधिकांश के घर में कार है।    सबके पक्के मकान बन गए हैं। हालत यह है कि घर और खेत के लिए मजदूर तक नहीं मिलते। सड़क निर्माण में जमीन अधिग्रहण से अधिकांश परिवार लखपति -करोड़पति हो गए हैं। आज मेरे गाँव की जमीन भी सोने के भाव बिक रही है। लोग पैसे लेकर घुम रहे लेकिन जमीन नहीं मिल रही है। सबको फ्री का आवास और अनाज जो मिल रहा है तो कौन काम करे? इसी तरह किसी भी गाँव शहर का उदाहरण देख सकते हैं। अयोध्या और काशी की तो दशा बदल गयी है। याद कीजिये 5 साल पहले की अयोध्या और आज की अयोध्या! जमीन आसमान का फर्क दिखता होगा। काशी, मथुरा, वृंदावन, उज्जैन का विकास देखिए। अपने बाबाधाम में ही अब इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एम्स बन गया है। रेल सुविधाओं का विस्तार हुआ है। राम मंदिर बनने के बाद सबको लगा रहा था कि भाजपा को बम्पर सीट मिलेगी लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति देखिए कि फ़ैजाबाद सीट ही हार गई। लोगों का  कहना है कि स्थानीय प्रत्याशी लल्लू सिंह ने कोई काम नहीं किया इसलिए उन्हें हराया। दुकानदारों की दुकानें छिनने का भी रोष था। ठीक है लल्लू सिंह ने काम नहीं किया लेकिन अयोध्या का विकास तो भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी ने ही किया न! आप उस काम के लिए तो वोट देते। केंद्र में मोदी की सरकार रहेगी तो सपा के सांसद कितना विकास कर देंगे? रही बात दुकान घर टूटने की तो आप बेशक मुआवजे के लिए लड़िये, अपनी मांग रखिये। विरोध में आप वोट का बहिष्कार भी कर देते तो भी बात समझ मे आती लेकिन उस दल को कमजोर करना जिसने अयोध्या की 500 वर्षो से अभिशप्त नगरी को पुनः सजाने सँवारने का काम किया। मन्दिर बनने से उसी क्षेत्र का तो सर्वांगीण विकास हुआ है। एक स्थानीय बता रहे थे कि पहले  पूरे मकान का किराया 2 से 3 हजार महीना मिलता था आज एक कमरे का किराया प्रतिदिन 2 से 3 हजार उठाते हैं। फूल-प्रसाद से लेकर घर दुकान तक का रोजगार बढा ही है। अयोध्या, काशी, मथुरा, वृंदावन जैसे शहर की पूरी अर्थव्यवस्था ही मंदिरों के भरोसे है। यूँ कहें कि भारत के अधिकांश शहर मन्दिरो के भरोसे चल रहे हैं। फिर भी उत्तरप्रदेश की जनता का विकास के बजाय महीना मुफ्त का साढ़े आठ हजार ला लालच और आरक्षण जैसे कोढ़ के डर से मोदी सरकार के विरूद्ध वोट करना दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जा सकता है। हालांकि इसके लिए भाजपा को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है। अपने कोर कार्यकर्ता की बजाय दलबदलू को टिकट देना भी नुकसानदायक रहा है। यूपी में सीटों के बंटवारे में मुख्यमंत्री योगी को पूर्ण स्वतंत्रता देनी चाहिए थी। जो अच्छे काम कर रहे थे उनका टिकट नहीं काटना था। संघ को लेकर चलना चाहिए था ऐसे कई महत्वपूर्ण बिंदु हैं जिनपर पार्टी को मंथन रखते हुए आगामी चुनाव की तैयारी में अभी से जुटने की आवश्यकता है। बंगाल में ममता बनर्जी के लिए रोहिंग्या और बंगलादेशी घुसपैठियों का बड़ा वोटबैंक है। ममता बनर्जी उनके अंदर CAA कानून का भय बिठाने में कामयाब रही। वहाँ एक मजबूत विकल्प की जरूरत है। 
 लब्बोलुआब यही कि हर क्षेत्र में विकास हुआ है बावजूद इसके मोदी सरकार को बहुमत नहीं मिलना देश का दुर्भाग्य है। इतिहास गवाह है कि गठबंधन की सरकार कभी स्थायी और मजबूत नहीं होती। पिछले दो कार्यकाल में जिस दृढ़ता के साथ सरकार ने निर्णय लिया तीसरे टर्म फर्क साफ दिखेगा। सहयोगी दल अभी से ही मलाईदार मंत्रालय मांगने लगे हैं जाहिर है उनका एकमात्र ध्येय मलाई काटना ही है विकास से कोई लेना देना नहीं होगा। गठबंधन सरकार के सहयोगी दल अपने ही विकास में लगे रहेंगे तो जाहिर तौर पर नुकसान देश की जनता का ही होगा। 

पंकज प्रियम

Sunday, April 28, 2024

९९३. मतदान करें

 निकल आओ घरों से अब, हमें सबको जगाना है.

हमारी वोट की ताकत, सकल जग को दिखाना है. 

मिला अधिकार है हमको, नया निर्माण करने को -

सही मतदान अब कर लो, नहीं  इसको गंवाना है..

पंकज प्रियम 


Sunday, April 21, 2024

992. गठजोड़

 गठजोड़

गुंडे हो या मुजरिम, बन कर बैठे मोर।
कैसी है ये सत्ता, कैसा है गठजोर।
नेता गज़ब ढाहे, नाचे ता ता थैया।
कुर्सी संभाले या संभाले अपनी नैया।
इस कुर्सी की माया, छाई है चहुँओर।
कैसी ये सत्ता, कैसा है गठजोर।
नेतवन की नैया को, लगावे ये किनारा।
बदले में खाते उनसे, सबका ही चारा।
मर्जी फिर तो इनकी, चलती है हर ओर।
कैसी ये सत्ता, कैसा है गठजोर।
जिनपर इनाम है जा, बैठे हैं संसदवा।
जनता के पैसे पर, घूमें है विदेसवा।
थाना, अफसर, कोटवा, सबपे इनका जोर।
कैसी ये सत्ता, कैसा है गठजोर।

Friday, April 19, 2024

991.निर्वाचन का मौसम

निर्वाचन का मौसम, नेताजी करे शोर।
घर-घर जाकर वोटवा, मांगे हाथ जोर। 

वोटवा हमीं को देना, देना रे भईया।
फिर तो दिखा देंगे, ता ता थईया।
इस वोटवा के चलते, करेंगे क्या क्या और
घर-घर जाकर वोटवा, मांगे हाथ जोर। 

नेतवा करे क्या जाने, सबको इशारा।
ले लो तू रुपया-पैसा, पर कर न किनारा।
अर्जी है हमारी, हो जाना हमरी ओर।
घर-घर जाकर वोटवा, मांगे हाथ जोर।

इसबार हमको भैया, भेज दो संसदवा
हम तो मिटाइये देंगे, देश से गरीबवा।
पाकर कुर्सी हम तो, न आएं इस ओर।
घर-घर जाकर वोटवा, मांगे हाथ जोर।
पंकज प्रियम
2 फरवरी 2004
अंतर्नाद

990. चुनावी जाल

जाल बिछाने आएंगे, चाल दिखाने आएंगे।
जात-पात के दाने से, तुम्हें फँसाने आएंगे।
तुमको बचके रहना है, इनके झूठे वादों से-
फँसे अगर इसजाल में, यही मिटाने आएंगे।।
पंकज प्रियम
अपने मत की कीमत समझें। अयोग्य पर बर्बाद न करें

Tuesday, April 16, 2024

९८९. दुर्गौत्पत्ति

 मची थी दानव प्रलय, 

देव हो गये थे विलय. 

चारो तरफ था हाहाकार 

तब माँ ने लिया अवतार. किया दानव संहार .

महिषासुर एक राक्षस, 

थी जिसमे शक्ति अपार 

सौ साल युद्ध किया 

स्वर्ग पे लिया अधिकार 

तब माँ ने लिया अवतार . किया दानव संहार 

महिषासुर से डरे 

सारे देव गये 

ब्रह्मा -विष्णु मिले 

भोले शंकर जुटे 

तब माँ का हुआ अविष्कार, किया दानव संहार . 

शिव का रूप लिया 

हरि का हाथ दिया 

अग्नि आंख बने 

बाकी ने दिया आकार, शक्ति हुई साकार.

शिव का शूल लिया 

विष्णु ने चक्र दिया 

सूर्य की किरणे निकली 

काल से मिली तलवार. किया दानव संहार 

अग्नि की शंक्ति मिली 

वायु का बाण चला 

इंद्र की वज्र गिरी 

सागर का पहन के हार. किया दानव संहार 

धरती दोलन लगी 

दानव भागन लगे 

देव हर्षित हुए 

महिषासुर का हुआ संहार. हुई जय जय जयकार. 


पंकज प्रियम 


Saturday, April 13, 2024

988. बाबा रामदेव और अदालत

टारगेट बाबा रामदेव नहीं, योग, आयुर्वेद और सनातन है

योग गुरु बाबा रामदेव ने भले ही अदालत का सम्मान करते हुए बिना शर्त माफी मांग ली लेकिन कोर्ट द्वारा उसे अस्वीकार करने से इतना तो स्पष्ट लगता है की टारगेट सिर्फ बाबा रामदेव और उनकी पतंजलि नहीं बल्कि योग, आयुर्वेद, सनातन और भारतीय संस्कृति है। लोगों को दिक्कत है एक सन्यासी वेशभूषा से, बाबा रामदेव में बाबा शब्द से, अनेक भगवा कपड़ों से, लोगों को दिक्कत हो रही है उनके भारतीय संस्कृति और सनातन के प्रति आस्था से, लोगों को परेशानी है बाबा रामदेव का प्रधानमंत्री मोदी के  समर्थन में खड़े होने से, उनके राम मंदिर उद्घाटन में ज़ोरदार उपस्थिति से, हर सुबह देशभर को योग सिखाने के उनके कर्म से, लोगों को दिक्कत है हर चैनल पर उनकी उपस्थिति से, हर चैनल पर पतंजलि के विज्ञापन से। लोगों को दिक्कत है उनका सनातन धर्म का जोरदार समर्थन करने से, दिक्कत हो रही है बाबा रामदेव के देशभर में वैदिक शिक्षा का गुरुकुल स्थापित करने से शिक्षा को बनिया की दुकान बनाने वाले अंग्रेजी मीडियम और मिशन स्कूलों को।तुष्टिकरण करने वाले लोगों को दिक्कत होती है बाबा रामदेव के हिंदुत्व वाले बयानों से। 
 भ्रामक दावे क्या सिर्फ पतंजलि में दिखती है अन्य सभी उत्पादों के विज्ञापन का सत्य हैं? फेयर एंड लवली से कौन गोरा हुआ है?, कोलगेट और पेप्सोडेंट से किसकी दांत मजबूत हुई है? कोका कोला पीने से कौन सी तूफ़ानी ताकत आ जाती है। सैकड़ो उतपाद और उनके झूठे विज्ञापनों को याद कीजिए। स्थिति ये है अब टीवी पर एड आते ही लोग चैनल बदल देते हैं। विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पाद हो या अंग्रेजी दवा, सभी कंपनियां लोगों को वर्षो से बेवकूफ बनाकर जेब पर डाका डालने का काम कर रही है लेकिन दिक्कत उनसे नहीं है। दिक्कत तो है भारतीय योग परंपरा, आयुर्वेद और सनातन धर्म से, जिसका ध्वज उठाकर बाबा रामदेव ने पूरे विश्व मे एक जागृति उत्पन्न कर दी। बिना किसी फिल्मी सितारों के अंगप्रदर्शन वाले विज्ञापन के बाबा रामदेव ने खुद अपने उत्पादों को बेचकर विज्ञापन का गणित ही बदल डाला। बाबा रामदेव ने योग की प्राचीन पद्धति को जन जन तक पहुंचाने का काम किया। इसे ही पश्चिमी देश योगा, ब्रीदिंग थेरेपी, एक्सरसाइजज़ ओरगेनिक उत्पाद के रूप में प्रचारित कर पेटेंट कराने में लगे है। वही बाबा रामदेव भारत की प्राचीन योग, आयुर्वेद और संस्कार के पुनर्जागरण करने में लगे हैं तो लोगों को दिक्कत हो रही है। बाबा रामदेव का ही प्रयास है कि 21 जून को विश्व योग दिवस में रूप में मान्यता मिली। लोग महंगे जिम में जाकर रोज पसीना बहाते हैं लेकिन वही बाबा रामदेव टीवी पर आकर मुफ्त में योग सिखाते हैं तो लोगों को दिक्कत है। 
पतंजलि के उत्पादों ने यूंही घर-घर में स्थान नहीं बना लिया है दरअसल पतंजलि के उत्पाद विदेशी कंपनियों के मुलाबले बहुत ही सस्ते और अच्छे हैं। बाबा रामदेव से तमाम विदेशी कंपनियां तो पहले  से खार खाये बैठी थी उपर से कोरोनिल लाकर उन्होंने सीधे-सीधे IMA से दुश्मनी मोल ले ली। कोरोनिल से किसी को दिक्कत नहीं हुई उल्टे उस दौर में सबको आराम ही मिला। इसके ठीक उलट कोरोना महामारी में निजी अस्पतालो ने इलाज के नाम पर जो खुलकर डकैती की उसके सभी भुक्तभोगी हैं। एक छोटे-मोटे अस्पताल में भी 2 दिन में लाखों  रुपये वसूले जा रहे थे। डॉक्टरों के एक गिरोह ने लाखों रुपये में नकली इंजेक्शन का धंधा कर लोगों की जान से खिलवाड़ किया। इसी तरह ऑक्सीजन सिलिंडर, दवा, सुई, इलाज, एम्बुलेन्स के नाम पर सबने जमकर जमकर लूट मचाई। आज भी इलाज, जाँच और दवा के नाम पर जिस तरह से लूट मची है उससे एक आम आदमी अस्पताल जाने के नाम पर ही सिहर जाता है। इलाज में कितनो के घर-बार, जमीन जायदाद बिक जाते हैं फिर भी बीमारी को सौ प्रतिशत ठीक करने की गारंटी कोई अस्पताल या डॉक्टर नहीं ले सकता। 
इस प्रकरण से बिल्कुल स्पष्ट है कि टारगेट सिर्फ राम देव नहीं बल्कि उनके नाम से जुड़े राम, योग, संत, सनातन और आयुर्वेद है। जिसके खिलाफ आज एक पूरा वैश्विक गिरोह षड्यंत्र में लगा है। हमें इस चक्रव्यूह को समझना होगा, जो भी भारत में हिन्दू, सनातन, या भारतीय संस्कृति की बात करता है उसके पीछे एक पूरा वर्ग काम करने लगता है। सुप्रीम कोर्ट को इन तमाम विषयों पर संज्ञान लेना चाहिए। बात अगर भ्रामक विज्ञापनों का है तो तमाम विज्ञापनों पर ही कार्रवाई होनी चाहिए। फिल्मी सितारों द्वारा झूठे विज्ञापनों के मकड़जाल में बच्चे-बड़े सभी उलझते चले जाते हैं। कार्रवाई तो उन तमाम विदेशी उत्पादों पर होने चाहिए जो भारत की बहुसंख्य आबादी की भावनाओं के साथ खेलते आ रहे हैं। कार्रवाई तो उन अस्पतालों पर भी होने चाहिए जो देश की गरीब आबादी को इलाज के नामपर खुलेआम लूटते आ रहे हैं। कार्रवाई उन डॉक्टरों पर भी होना चाहिए जो वेतन तो सरकार से लेते हैं लेकिन प्रैक्टिस प्राइवेट करते हैं। कार्रवाई तो खुद अदालतों को अपने उपर करनी चाहिए जो मुकदमे को तारीखों के घनचक्कर में आम आदमी की चप्पलें घिसवाने का काम करती है। आतंकवादियो के लिए आधीरात को अदालतें खुल सकती है लेकिन एक आम आदमी एक अदद तारीख के लिए तरस जाता है। जबतक न्याय मिलता है तबतक बहुत देर हो चुकी होती है। कई उदाहरण ऐसे हैं कि वर्षों तक जेल की सजा काटने के बाद उसे निर्दोष साबित किया जाता है। बचपन मे जेल गया व्यक्ति बूढ़ा होकर जब निर्दोष होकर बाहर निकलता है तो फिर उसे न्याय कहेंगे क्या? कहते हैं कि देर से मिला न्याय भी अन्याय ही है। कार्रवाई तो उन स्कूलों पर भी होना चाहिए जो शिक्षा के नाम पर मनमाने दाम पर किताब, कॉपी, जूते, बस्ते, ड्रेस की दुकान खोलकर बैठे हैं। किसी एक व्यक्ति पर टारगेट करने से सिस्टम में बदलाव नहीं आएगा। 
पंकज प्रियम

Monday, March 25, 2024

987.होली का त्यौहार है

रंग का उल्लास लिए, 
   भंग का गिलास लिए,
       आओ मिल खेलें होली, 
                 रंग का त्यौहार है।
दहीबड़ा, धुस्का और 
   गुजिया पकौड़े तलों
       ठंडई मिलाके पियो, 
              चढ़ता खुमार है।
रँगभरी पिचकारी
    खेले सभी नर-नारी
        गाल में गुलाल डाल
               बढ़ता ये प्यार है।
मन में उमंग लिए
   दिल में तरंग लिए
      नाचो गाओ झूमो चली
                 फगुआ बयार है।
          
           कवि पंकज प्रियम

Friday, March 22, 2024

986.चुनावी जोगीरा

चुनावी जोगीरा

खेल रहे मोबाइल में ही, होली का सब रंग।

फेसबुक इंस्टा में करे सब, होली का हुडदंग।

जोगीरा सा रा रा

बड़े सयाने बोल गये हैं, करती हानि शराब।

बदनामी तो निश्चित होवे, सेहत होत खराब।

जोगीरा सारा रा रा रा

लग जाये दारू की लत तो, बिक जाए घरबार।

देख पहुँच गयी जेल में अब, दिल्ली की सरकार।।

जोगीरा सारा रा रा रा

खेल शराबी खेलत-खेलत, उलट गयी खुद चाल।

मुँह के बल ही गिरे पड़े हैं, देख केजरीवाल।

जोगीरा सारा रा रा रा

धोती कुर्ता झाड़े देखो, मुछ में देते ताव।

पार्टी दल सब बदल रहे हैं, आया देख चुनाव।।

जोगीरा सारा रा रा रा

सभी विरोधी बोल रहे हैं, सत्ता करती खेल।

इडी छापा मार के देखो, भेजे सबको जेल।।

जोगीरा सारा रा रा रा

चक्की सारे पीस रहे हैं, जेल में नेता आज।

आपस में खुजलाते सारे, कोढ़ी खुजली खाज।

जोगीरा सारा रा रा रा

खेला खेलन पाँव तुड़ाया, फोड़ा आज कपार।

नौटंकी ममता करे अजी, जनता जाए हार।।

जोगीरा सा रा रा रा 

चंदा पाकर खाकर देखो, सबने लिया पचाय।

चंदा धंधा बुरा बताकर, कैसे सब चिल्लाय।।

जोगीरा..

बॉण्ड बुरा यदि मानते सुन लो, जनता में दो बांट।

बांट दिया तो फिर सुनो खड़ी, होगी तेरी खाट।।

जोगीरा सा रा रा रा 


पंकज प्रियम

Sunday, January 21, 2024

985. राम अँगने में बाबर का क्या काम है?

राम मंदिर: भारतीय आस्था का प्रतीक
पंकज प्रियम

22 जनवरी 2024 का दिन इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अंकित हो गया है जिसदिन प्रभु श्री राम अपनी जन्मभूमि पर विराजमान हो गए। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर जिस तरह पूरे विश्व में एक भक्तिमय भाव उमड़ा वह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। क्या गांव और क्या शहर? बच्चे-बूढ़े, नर-नारी हर कोई रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से उत्साहित है और देशभर में होली-दीवाली सा माहौल है। घर-घर दीप जले और चहुँओर मंगल गीत गाये जा रहे हैं। गली-चौक चौराहे राम पताका से सजे हुए हैं और दशो दिशाओं में बस रामनाम की गूँज है। हर किसी का मन आह्लादित है और पूरी अयोध्या दुल्हन सी सजी हुई है। त्रेतायुग में जब प्रभु श्रीराम वनवास से घर लौटे होंगे तब क्या दृश्य रहा होगा वह आज जीवंत हो गया है। इस सुनहरे युग का साक्षी बनना हम सभी के लिए गौरवशाली है। यह उत्सव का क्षण पाना एक स्वप्न के पूर्ण होने के समान ही है जिसके लिए हजारों लाखों सनातनियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है , पिछले पांच सौ वर्षों ले कठिन संघर्ष के बाद यह सुनहरा दिन आया है। 
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने त्रेतायुग के अपने जीवनकाल में तो सिर्फ 14 वर्षों का वनवास काटा था लेकिन इस कलियुग में अपनी जन्मभूमि पर लौटने हेतु 500 वर्ष की प्रतीक्षा करनी पड़ी। यूँ तो प्रभु श्री राम इस धरती के कण-कण में व्याप्त हैं। अयोध्या की पावन भूमि प्रभु श्रीराम को उनके जन्मस्थान पर विराजमान होने के लिए वर्षों तक तड़पती रही। एक लंबा संघर्ष चलता रहा, देश के तमाम रामभक्त इस दिन के लिए लड़ते रहे और लाखों लोग धर्म स्थापना के इस युद्ध मे वीरगति को प्राप्त हो गए। आज निश्चित ही उनकी आत्मा को शांति मिली होगी जब श्रीरामलला अपने जन्मस्थान पर बने भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं। यह भारत देश ही था जहाँ प्रभु श्रीराम को भी अदालत में अपने जन्म का सबूत पेश करना पड़ा है। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता था कि विधर्मियों की तो बात छोड़िए हिन्दू धर्म के लोगों ने ही रामजन्मभूमि की लड़ाई  में भगवान राम की खिलाफत की। लोगों ने राम के होने पर भी सवाल उठाया, कोर्ट ने राम के वंशज पर सवाल खड़े किया। यहाँ तक कि राम को काल्पनिक पात्र बता दिया गया लेकिन प्रभु राम तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं वे इतने वर्षों तक धैर्य धारण करते रहे और सबकुछ देखते रहे। वर्षो तक रामलला एक टेंट में रहे, गर्मी, बरसात हर मौसम में इसी हाल में उनकी पूजा होती रही। टेंट फटने पर कपड़ा बदलने हेतु कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती थी। जगत के पालनहार विष्णु के अवतार और अयोध्या के राजा राम को एक वस्त्र के लिए भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की जरूरत पड़ती थी। तुष्टिकरण की राजनीति और ब्रिटिश साम्राज्य के कानूनों के कारण श्रीरामलला को इतने कष्ट सहने पड़े। मानो अदालतें राम से ऊपर हो गयी थी, सरकारें प्रभु राम से बढ़कर हो गयी थी। इतने वर्षों तक यह मामला लटका नहीं, जानबूझकर लटकाया गया ताकि एक समुदाय विशेष का वोटबैंक खराब न हो जाये। आज़ादी के बाद की सरकारें चाहती तो आराम से इस मामले का हल निकाल कर बहुत पहले राम मंदिर का निर्माण कर लेती लेकिन किसी ने यह काम नहीं किया उल्टे मुलायम सरकार ने निहत्थे कारसेवकों पर गोलियां बरसा दी। इस मामले में मुस्लिम समुदाय की भी भूमिका नकारात्मक ही रही। यह सर्वव्यापी मान्यता और करोडों रामभक्तों की आस्था थी कि अयोध्या राम की जन्मभूमि है ऐसे में उन्हें सहर्ष यह भूमि राम मंदिर हेतु दे देना चाहिए था। यह तो ऐतिहासिक तथ्य है कि बाबर के सिपहसालार मीर बांकी ने पुराने राम मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद बनाया था। आखिर बाबर का अयोध्या में क्या काम? वहाँ क्या उसका जन्म हुआ था जो एक विदेशी लुटेरे के नाम पर मस्जिद बना दी गई?

पौराणिक मान्यता है कि अयोध्या को सतयुग में वैवस्वत मनु ने बनवाया था। वाल्मीकि रामायण के अनुसार इसी नगरी में चक्रवर्ती सम्राट दशरथ के घर भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। वनवास से लौटने के बाद वर्षों तक अयोध्या में राम राज चला। इसके बाद श्री राम स्वयं सरयू नदी के गुप्तार घाट में जल समाधि लेकर बैकुंठ लोक सिधार गए। कई साल बाद उज्जयिनी के राजा विक्रमादित्य इस धरती पर आखेट करने के लिए पहुंचे। उन्होंने पृथ्वी पर कुछ चमत्कारी घटना घटते देखी। फिर उन्होंने उस जगह के इतिहास के बारे में जाना और उस पर शोध किया। तब उन्हें यहां श्री राम की उपस्थिति के प्रमाण मिले। इसके बाद उन्होंने काले कसौटी पत्थरों का उपयोग करके 84 स्तंभों वाला एक मंदिर बनवाया। इसके बाद में कई राजा राज्यों के बीच आये और गये। भारत में मुगल शासन की शुरुआत 14वीं शताब्दी में हुई। सन 1525 में मुगल सम्राट बाबर के सिपहसालार मीर बांकी ने राम जन्मभूमि पर प्राचीन मंदिर को नष्ट कर दिया और उसके स्थान पर एक मस्जिद का निर्माण किया।
ऐतिहासिक अभिलेख और यात्रियों के विवरण में अयोध्या में जन्मभूमि के आसपास विकसित कहानियों का जिक्र है अंग्रेज यात्री विलियम फिंच ने 1611 में अपनी अयोध्या यात्रा के दौरान खंडहरों को दर्ज किया लेकिन किसी मस्जिद का कोई उल्लेख नहीं किया। जेसुइट मिशनरी जोसेफ टिफेनथेलर ने 18वीं शताब्दी में अयोध्या का दौरा करते हुए भगवान राम से जुड़े एक किले के विध्वंस और उसके स्थान पर एक मस्जिद के निर्माण के बारे में लिखा था। 1810 में फ्रांसिस बुकानन सहित बाद के आगंतुकों ने राम को समर्पित एक मंदिर के अस्तित्व पर ध्यान दिया, जिसे मस्जिद द्वारा बदल दिया गया था। बाबरी मस्जिद पर शिलालेखों की प्रामाणिकता को लेकर विवाद है, दावा किया जा रहा है कि उन्हें बहुत बाद में जोड़ा गया था, जिससे बाबर के युग के साथ मस्जिद के वास्तविक ऐतिहासिक संबंध पर सवाल उठते हैं
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा 1978 और 2003 में की गई दो पुरातात्विक खुदाई में इस बात के सबूत मिले कि इस स्थान पर हिंदू मंदिर के अवशेष मौजूद थे। पुरातत्वविद् के के मुहम्मद ने कई वामपंथी विचारधारा वाले इतिहासकारों पर निष्कर्षों को कमजोर करने का आरोप लगाया। अयोध्या जमीन विवाद मामला देश के सबसे लंबे चलने वाले केस में से एक रहा। 
राम मंदिर विवाद के इतिहास में 5 अगस्त 2020 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। 1528 से लेकर 2020 तक तकरीबन 5 सौ वर्षो में कई ऐतिहासिक मोड़ आये और कुछ मील के पत्थर भी पार हुए। खास तौर से 9 नवंबर 2019 का दिन जब 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने ऐतिहासिक फैसले को सुनाया। 

राम मंदिर की संघर्ष गाथा

साल 1528: विदेशी आक्रांता मुगल बादशाह बाबर के सिपहसालार मीर बाकी ने विवादित स्थल पर एक मस्जिद का निर्माण कराया। इसे लेकर हिंदू समुदाय ने दावा किया कि यह जगह भगवान राम की जन्मभूमि है और यहां एक प्राचीन मंदिर था। हिंदू पक्ष के मुताबिक मुख्य गुंबद के नीचे ही भगवान राम का जन्मस्थान था। बाबरी मस्जिद में तीन गुंबदें थीं।
मन्दिर मस्जिद को लेकर 1853 में इस जगह के आसपास पहली बार दंगे हुए। 
1859 में अंग्रेजी प्रशासन ने विवादित जगह के आसपास बाड़ लगाकर घेराबंदी कर दी। मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की इजाजत दी गई।
असली विवाद शुरू हुआ 23 दिसंबर 1949 को, जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुसलमानों ने आरोप लगाया कि किसी ने रात में चुपचाप मूर्तियां वहां रख दीं। यूपी सरकार ने मूर्तियां हटाने का आदेश दिया, लेकिन जिला मैजिस्ट्रेट  के के नायर ने दंगों और हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के डर से इस आदेश को पूरा करने में असमर्थता जताई। सरकार ने इसे विवादित ढांचा मानकर ताला लगवा दिया।
साल 1950 में फैजाबाद सिविल कोर्ट में दो अर्जी दाखिल की गई। इसमें एक में रामलला की पूजा की इजाजत और दूसरे में विवादित ढांचे में भगवान राम की मूर्ति रखे रहने की इजाजत मांगी गई। 1959 में निर्मोही अखाड़ा ने तीसरी अर्जी दाखिल की।

साल 1961 में यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अर्जी दाखिल कर विवादित जगह के पजेशन और मूर्तियां हटाने की मांग की।
साल 1984 में विवादित ढांचे की जगह मंदिर बनाने के लिए 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने एक कमिटी गठित की।

साल 1986 में यूसी पांडे की याचिका पर फैजाबाद के जिला जज केएम पांडे ने 1 फरवरी 1986 को हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत देते हुए ढांचे पर से ताला हटाने का आदेश दिया।
6 दिसंबर 1992 को विश्वहिंदू परिषद और शिवसेना समेत दूसरे हिंदू संगठनों के लाखों कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को गिरा दिया। देश भर में सांप्रदायिक दंगे भड़के गए, जिनमें 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए।

साल 2002 में  हिंदू कार्यकर्ताओं को लेकर जा रही ट्रेन में गोधरा में आग लगा दी गई, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई। इसकी वजह से गुजरात में हुए दंगे में 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए।
साल 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा के बीच 3 बराबर-बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया।
साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।
साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट का आह्वान किया। बीजेपी के शीर्ष नेताओं पर आपराधिक साजिश के आरोप फिर से बहाल किए।

8 मार्च 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा। पैनल को 8 सप्ताह के अंदर कार्यवाही खत्म करने को कहा।

1 अगस्त 2019 को मध्यस्थता पैनल ने रिपोर्ट प्रस्तुत की। 2 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता पैनल मामले का समाधान निकालने में विफल रहा।
इसके बाद 6 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई।
16 अक्टूबर 2019 को अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रखा।

फिर आया 9 नवंबर 2019 का ऐतिहासिक दिन जब पूरे देश की सांसे थमी हई थी।  सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया। 2.77 एकड़ विवादित जमीन हिंदू पक्ष को मिली। मस्जिद के लिए अलग से 5 एकड़ जमीन मुहैया कराने का आदेश दिया।
25 मार्च 2020 को तकरीबन 28 साल बाद रामलला टेंट से निकलर फाइबर के मंदिर में शिफ्ट हुए।
5 अगस्त 2020 को राम मंदिर का भूमि पूजन कार्यक्रम हुआ जिसके बाद मन्दिर।निर्माण का कार्य शुरू हो गया। 18 से 20।नवंबर 2022 को अयोध्या में जन रामायण महोत्सव के दौरान मन्दिर निर्माण कार्य को अपनी आँखों से देखने का सौभाग्य मिला था। आज करोडों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक राम मंदिर बनकर तैयार है जो सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि हर भारतीय के स्वाभिमान से जुड़ा है जिसे वर्षो पूर्व एक विदेशी लुटेरे बाबर ने अपनी कुत्सित मानसिकता से कुचलने का कुकर्म किया था। आज हर भारतवासी गौरवान्वित है कि वर्षों की प्रतीक्षा पूर्ण हुई और प्रभु श्रीरामलला स्थापित हो चुके हैं। इस कार्य मे जिनका भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष योगदान रहा सभी का नाम इतिहास में दर्ज हो चुका है। उम्मीद है कि रामलला विराजमान होने के बाद रामराज्य की कल्पना भी साकार हो। मथुरा और काशी में हमारे आराध्य कृष्ण और बाबा विश्वनाथ मुगलिया अतिक्रमण से मुक्त हों। 
जय श्री राम
जय श्री राम

984.चलो अयोध्या धाम

चलो अयोध्या धाम
रामलला का दर्शन करने,     चलो अयोध्या धाम।
राम नाम से बन जाते हैं,         बिगड़े सारे काम।

राम विराजे अपने घर में,..... बनकर पालनहार।
धरती हर्षित अम्बर पुलकित, आह्लादित संसार।
गली-गली में गूँज रहा बस.....मेरे प्रभु का नाम।
राम नाम से बन जाते हैं........बिगड़े सारे काम।।

अवधपुरी में मनी दिवाली .   दीप जले हर द्वार।
सजी अयोध्या दुल्हन जैसी, कर सोलह सिंगार।
सरयू धारा कल-कल पल-पल, पाँव पखारे राम।
राम नाम से बन जाते हैं, .....बिगड़े सारे काम।

पांच सदी संघर्ष हुआ तब, आया दिन यह खास।
लाखों भक्तों ने तजि तन को .लेकर मंदिर आस।
कार सेवकों की बलिदानी, ...कौन चुकाए दाम।
राम नाम से बन जाते हैं........बिगड़े सारे काम।

रामलला दरबार सजा तो, ...जगमग चारो धाम।
सत्य सनातन युग फिर आया, गूँजत आठो याम
घर-घर भगवा लहराया है, बोलो जय श्री राम।
राम नाम से बन जाते हैं, ...बिगड़े सारे काम।।

पंकज प्रियम

Wednesday, January 17, 2024

983.राम अवध में आये हैं

घर-घर दीप जलाओ रे, मंगल गीत सुनाओ रे।
वर्षों का वनवास बिताकर, जनमन में विश्वास जगाकर
फिर अपने घर में आये हैं, सियाराम अवध में आये हैं।

पग-पग पलक बिछाओ रे, प्रेम पुष्प सजाओ रे।
मर्यादा का पाठ पढ़ाकर, जीती लंका मारके ठोकर
नंगे पांव ही चलकर, स्वामी जगत के आये हैं। 
सियाराम अवध में आये हैं। 




Tuesday, January 16, 2024

982.राम कृपा संसार

राम कृपा संसार
प्रभु राम से धरती अम्बर, राम कृपा संसार।
राम नाम तू जप ले बंदे, होगा बेड़ा पार।

कण-कण में प्रभु राम बिराजे, जन-गण में श्रीराम।
राम से बढ़कर नाम है उनका, भज लो सीताराम।
राम नाम से गङ्गा अविरल, सरयू कल-कल धार।
राम नाम तू जप ले बंदे, होगा बेड़ा पार।

सबरी के जूठे बेरों को, खाये करुण निधान।
बाली से सुग्रीव बचाये, केवट रखते मान। 
विभीषण को लँका सिंहासन, मित्र बड़े दिलदार। 
राम नाम तू जप ले बंदे, होगा बेड़ा पार।

मर्यादा पुरुषोत्तम हैं जो, सीता बसते प्राण।
मातु-पिता के आज्ञाकारी,दुश्मन हरते त्राण।
दुष्टदलन रिपुनाशक विष्णु के हैं वो अवतार।
राम नाम तू जप ले बंदे, होगा बेड़ा पार।

रोम-रोम में बसते हैं वो, भक्त हृदय हनुमान। 
भ्राता लक्ष्मण, भरत-शत्रुघ्न, सबकी हैं वो जान।
लंका चढ़के रावण मारे, सागर सेतु अपार।
राम नाम तू जप ले बंदे, होगा बेड़ा पार।

राम नाम को जपकर ही तो, गाँधी बने महान।
डाकू रत्नाकर भी जपकर्ज़ बाल्मीकि पहचान।
राम नाम से अंतिम यात्रा, राम नाम संस्कार।
राम नाम तू जप ले बंदे, होगा बेड़ा पार।
पंकज प्रियम