Monday, February 4, 2019

516.याद करके तुझे

गीत
मापनी-212    212  212  212
मुखड़ा-
नाम लेकर तेरा.... गुनगुनाने लगे
याद करके तुझे.... मुस्कुराने लगे।
प्यार में इस कदर हम दिवाने हुए।
ख़्वाब में भी तुझे हम जगाने लगे।
अंतरा-1
संगमरमर बदन वो झलकता हुआ
रूप यौवन भरा वो छलकता हुआ।
आँख से जाम तुम जो पिलाने लगे
ताल से ताल..हम तो मिलाने लगे।
नाम लेकर....
2
ज़ुल्फ़ सावन घटा घोर छाने लगी।
हुस्न को देख..बरसात आने लगी।
आग पानी में तुम, जो लगाने लगे,
इश्क़ की आग दिल में जलाने लगे।
नाम लेकर .....
3
धड़कनों में सदा तुम धड़कते रहे।
सांस बनकर रगों में फड़कते रहे।
जिस्म से रूह में तुम उतर जो गए,
जान लेकर ...मेरी जां बचाने लगे।
नाम लेकर ...
4
होठ अंगार .जलते-दहकते सनम।
होश मदहोश करते बहकते कदम।
बिजलियाँ इस कदर जो गिराने लगे
चोट खाकर....तुम्हीं में समाने लगे।
नाम लेकर...
5
लफ्ज़ बनके कलम से बिखरते रहे
गीत ग़ज़लों में ढलते निखरते रहे।
चाँद बनके गगन झिलमिलाने लगे
फूल भी बाग में खिलखिलाने लगे।
नाम लेकर....
©पंकज प्रियम

3 comments:

NITU THAKUR said...

बहुत खूब.... खूबसूरत

अनीता सैनी said...

बहुत ही सुन्दर
सादर

पंकज प्रियम said...

bahut abhar ap dono ka