मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
कौन कहता है कि भारत में मंदी है, कौन कहता है कोरोना तालाबंदी है। जरा देख लो दारू की दुकानों में- भीड़ की तस्वीर कितनी गंदी है।। ©पंकज प्रियम
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