मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
ज़हर प्रदूषण तुम करोगे तो, कहर अब मार डालेगा। हवा पानी प्रदूषित हो, ज़हर सब मार डालेगा। अभी आगाज़ है ये सब, अगर जो तुम नहीं चेते- तुम्हारा ही बसाया ये, शहर तब मार डालेगा। ©पंकज प्रियम
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