मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
देख लो शासन वालों ने, क्या गज़ब कर डाला है, बन्द रखा है शिवालों को, खोल दिया मधुशाला है। लॉकडाउन के पीरियड में, जब सारे कैद घरों में तो दवा न मिलती है लेकिन, खुल गया दर हाला है।। ©पंकज प्रियम
बेहतरीन सर 👌
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