मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
गणेश चतुर्थी की ढेरों शुभकामनाएं
विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य तुम,हे गजानन! अभी कहाँ हो? अज़ब गति है तेरी विनायक,कभी यहाँ हो,कभी वहाँ हो। हमारा तनमन तुझे ही अर्पण,कभी करा दो मुझे भी दर्शन बरस रही है तरस के नैना,दरस दिखा दो अभी जहाँ हो।
©पंकज प्रियम
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