मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
मैं कलम हूँ कभी मैं शब्द सृजन करता,कभी हथियार बनता हूँ शब्दों की सरिता का,मैं शीतल धार बनता हूँ किसी की मौत की तारीख मुकर्रर जब कोई करता उस फैसले के साथ,खुद मौत मैं स्वीकार करता हूँ। ✍पंकज प्रियम
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