मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
छुपी आगोश में धरती, मुहब्बत देख बादल का, बड़ा ही खूबसूरत सा, नजारा देख इस पल का। समायी है धरा कैसी, जलद की बांह में जाकर- मनोरम है बड़ा देखो, मिलन वसुधा व बादल का।। ©पंकज प्रियम
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