मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
ख़्वाब भर दूँगा
निगाहों के समंदर में,हसीं इक ख़्वाब भर दूँगा अधर को चूमकर तेरे, कली गुलाब कर दूँगा सुवासित हो मेरा जीवन,बदन महके तेरा चंदन मुझे ना आजमाना तुम, तुझे बेताब कर दूँगा। ©पंकज प्रियम
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