मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
सपने। मुक्तक
पलक जो बन्द कर देखा,वही सपना होता है पलक जो खोल कर देखा,वही अपना होता है कहाँ पूरे हुए सपने,कहाँ कब हो सके अपने उड़ा दो नींद आंखों की,तभी अपना होता है।
©पंकज प्रियम
Post a Comment
No comments:
Post a Comment