Monday, October 8, 2018

450.धरोहर

धरोहर

हमारे संस्कार
हमारी संस्कृति
बड़ों का प्यार
संयुक्त परिवार
यही तो धरोहर है।
बड़ों का सम्मान
आतिथ्य का मान
छोटे छोटे अरमान
मन्दिर की घण्टी
मस्जिद का अज़ान
यही तो धरोहर है।
आलीशन भवन नहीं
मीनारें छूती गगन नही
नहीं ये नहीं धरोहर है
प्रेम करुणा धर्म जीवन
सहिष्णुता कर्म समर्पण
प्रेम में जो जीवन तर्पण
वही तो धरोहर है।
©पंकज प्रियम

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