Friday, October 5, 2018

448.मुक्तक। प्रकृति

मुक्तक

खिले जो पुष्प उपवन में,भ्रमर करते अनुगूँजन
भरे जो वृक्ष जंगल में,भ्रमण करते वन जीवन
प्रकृति आस वसुधा की,प्रकृति सांस जीवन की
रहे खुशहाल ये जीवन,अगर करते संरक्षण।

©पंकज प्रियम

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