मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
नहीं मैं बाग में खिलता....नहीं बाजार में मिलता, उतर दिल के समंदर में, भँवर मझधार में मिलता। नहीं मुश्किल पहेली मैं, अगर पाना कभी मुझको- कभी दिल हार के देखो, प्रियम उस हार में मिलता।
©पंकज प्रियम
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