मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
छोटी ऊँगली उठा गोबर्धन, अहम इन्द्र का चूर किया। कृष्ण कन्हैया राधेमोहन, संकट सबका दूर किया।
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