मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
1222 1222 1222 1222 करे सब कामना औरत, सुहागन ही रहूँ साजन, पति की उम्र बढ़ने की, करे उपवास वो हरक्षण। कभी यमराज से लड़ती, बनी वो सावित्री रानी- भरा सिंदूर लाली और मंगलसूत्र से धड़कन।। ©पंकज प्रियम गिरिडीह, झारखंड
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