मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
नभ में इतराइ जब तरुण-अरुण लालिमा रक्त किरणों से सजा जब धरा- आसमां। पुलकित प्रभात जल-तरंगों से आ मिला, हर्षित हुआ पंक तो जल से कमल खिला।
©पंकज प्रियम
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