समंदर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, मुझे खामोश रहने दो, छुपा है इश्क़ का दरिया, उसे खामोश बहने दो। नहीं मशहूर की चाहत, नहीं चाहूँ धनो दौलत- मुसाफ़िर अल्फ़ाज़ों का, मुझे खामोश चलने दो। ©पंकज प्रियम
Wednesday, December 22, 2021
935. प्रेम प्रतीक
Tuesday, December 21, 2021
934.ज्ञान की बातें
Monday, December 20, 2021
933. मुहब्बत का ठाँव
Tuesday, November 2, 2021
932. बुद्धि और लक्ष्मी
Wednesday, October 27, 2021
931.ज़ख्म मेरा रो रहा
*ज़ख्म मेरा रो रहा*
क्या कहूँ कैसे कहूँ माँ, दर्द कितना हो रहा?
दूर तुमसे हूँ जो हरपल, ज़ख्म मेरा रो रहा।
गर्भ से बाहर निकलकर, किस जहाँ हम आ गये,
पास में तुम भी नहीं हो, ये कहाँ हम आ गये?
दूध की चाहत अधर को, पर दवाई पी रहे,
अंग उलझे तार नस-नस, ज़िंदगी ये जी रहे।
क्या ख़ता थी मेरी ईश्वर, जो सज़ा मुझको दिया,
रातदिन सब पूजते फिर, क्यूँ दगा मुझको दिया?
बालमन भगवान मूरत, नासमझ होते सभी,
दर्द देकर क्या तुझे भी, चैन मिलता है कभी?
तुम कृपा करते हो हरदम, देव दानव पर सदा,
क्यूँ परीक्षा लेते भगवान, पूजते ईश्वर सदा।
मौत से खुद लड़ रहे हैं, तुम तनिक तो साथ दो,
जीतकर बाहर निकलने, तुम जरा सा हाथ दो।
©पंकज प्रियम
Tuesday, October 26, 2021
930. दर्द अब दिखता नहीं
Sunday, October 17, 2021
929. माँ गौरी
928. अजब झारखण्ड की गजब कहानी
अजब झारखण्ड की गजब कहानी
व्यंग्य संस्मरण
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जीते जी शोकसभा
*इससे पहले 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मधुकोड़ा ने सोनिया गाँधी को दी थी श्रद्धाजंलि
खेल-खिलाड़ी और खनिज संसाधनों से परिपूर्ण झारखंड का सियासी गलियारा भी हमेशा चर्चा में रहता है। सियासी पिच पर हमेशा चौके-छक्के लगते रहते हैं। सरकार गिराने से लेकर बनाने और घोटाले घपलों की अमर कहानी तक। आये दिन कुछ ऐसा हो जाता है कि झारखंड दुनियाभर में चर्चा का केंद्र बन जाता है। ताज़ा मामला पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को जीते जी श्रद्धाजंलि और शोकसभा करने का है। झारखण्ड सरकार के कला संस्कृति मंत्री हफीजुल हसन ने एक जनसभा में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जीते जी शोकसभा करवा दी। मधुपुर से पिता हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद उनकी जगह पर मनोनीत मंत्री हफीजुल हसन ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक दुख की।ख़बर है पूर्व मनमोहन सिंह का निधन हो गया है इसलिए सभी 1 मिनट का मौन रखकर शोकसभा करें। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री का दिल्ली स्थित एम्स में इलाज़ चल रहा है। हफीजुल हसन मधुपुर उपचुनाव में निर्वाचित होकर विधायक बन चुके हैं। इनके पिता हाजी हुसैन अंसारी का झारखंड सरकार में मंत्री रहते हुए निधन हो गया था। झारखंड में कॉंग्रेस-झामुमो गठबंधन की सरकार है और हफीजुल झामुमो कोटे से मंत्री हैं।
इससे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मधुकोड़ा ने सोनिया गांधी को श्रद्धाजंलि दे दी थी। उसवक्त मैं ईटीवी राँची में कार्यरत था। 30 अक्टूबर 2007 को राँची स्थित कॉंग्रेस प्रदेश कार्यालय में इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर शोकसभा आयोजित थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मधुकोड़ा श्रद्धांजलि देने पहुँचे और संयोग कवर करने सिर्फ मैं ही था। बाहर निकलते ही मैंने गनमाइक लगा दिया। मधुकोड़ा ने जो बयान दिया उससे मैं चौंक गया-उनके शब्द यूँ थे-माननीया सोनिया गांधी ने इस देश की ख़ातिर अपने सीने पर गोलियां खायी है। आज सोनिया गांधी की शहादत दिवस है। हम सोनिया गाँधी जी को श्रद्धांजलि देते हैं।"
एकबार ज़ुबान फिसल सकती है लेकिन उन्होंने बार-बार इंदिरा की जगह सोनिया का ही नाम लिया। बस फिर क्या था। मैं भागा अपने ऑफिस और ब्रेकिंग न्यूज़- "मुख्यमंत्री मधुकोड़ा ने दी सोनिया गाँधी को जीते जी श्रद्धांजलि".
उसदिन सिर्फ यही ख़बर चलती रही। सीएम हाउस हरकत में आ चुका था और ईटीवी का प्रसारण रुकवा दिया। लेकिन तबतक ख़बर की आग लग चुकी थी।सभी नेशनल इंटरनेशनल चैनलों से उस फुटेज की मांग होनै लगी।रात के 2 बजे तक मैं सारे चैनलों को वह फुटेज ट्रांसफर करता रहा। उसवक्त व्हाट्सएप या वीडियो ट्रांसफर की सुविधा नहीं थी। फायरवायर से कैमरा-टू-कैमरा वीडियो ट्रांसफ़र करना पड़ता था। उसवक्त कॉंग्रेस समर्थित सरकार थी। ख़बर ने असर दिखाया और सूत्रों की मानें तो 10 जनपथ से मधुकोड़ा को माफ़ी मांगने का फरमान सुना दिया गया था। बाद में शायद माफ़ी माँगकर मामला सुलझाया गया।
ख़ैर झारखण्ड की अपनी अलग खूबसूरती है तो हर चीज एक अलग अंदाज़ में होना भी चाहिए। बस बोलना ही है गीत जहाँ बस चलना ही है नृत्य वहाँ सियासी मैदान में झकझुमर तो बनता ही है।
जोहार झारखंड
कवि पंकज प्रियम
Saturday, October 16, 2021
927.दो बैल और एक इंजेक्शन
Saturday, August 7, 2021
९२६. सरस्वती वन्दना
शारदे माता सरस्वती, चरण नवाऊं शीश।
भारती वीणावादिनी, दे मुझको आशीष।
रुके न मेरी लेखनी, दो इतना वरदान।
सबकी पीड़ा हर सकूँ, करूँ जगत कल्याण।
Friday, August 6, 2021
925.सोहन लाल द्विवेदी

Wednesday, August 4, 2021
924. बारिश
मुक्तक घटा घनघोर है छाई , लगे ज्यूँ शाम गहरायी. दिखे न राह कुछ आगे, लगे ज्यूँ धुंध लहरायी. मगर जब बात बच्चों की, भला माँ-बाप क्या सोचे- पकड़ छतरी निकल आये, भले बरसात है आयी.. ✍️पंकज प्रियम
Saturday, July 31, 2021
923.प्रेमचंद
सिपाही थे कलम के जो, अभी भी नाम उनका है।
अटल साहित्य सूरज थे, चमकता काम उनका है।
विषमताओं से रिश्ता था, नहीं पर हार मानी थी-
कलम हथियार कर डाला, सृजन अंज़ाम उनका है।।
लिखा सोज़े वतन जब था, हिली सारी हुकूमत थी।
किया फिर जब्त था उसको, कलम में वो ताकत थी।
भले ही नाम था बदला , नहीं हथियार पर डाली-
बने जो प्रेम धनपत से, मिली उनको मुहब्बत थी।।
©पंकज प्रियम
Thursday, July 29, 2021
922. सावन में दूध
सावन में दूध
गत वर्ष एक अख़बार ने मुहिम शुरू की है कि सावन में सिर्फ दो बूँद से भगवान शिव का अभिषेक करें बाकी दान कर दें। कुछ इसी तरह की दलील pk फ़िल्म में भी दी गयी थी। हिन्दू धर्मों पर प्रहार करने की आज प्रचलन चल गयी है जो जितना सनातनी धर्म को नीचा दिखाएगा वो उतना बड़ा बुद्धिजीवी और धर्मनिरपेक्ष कहलाएगा। दूसरे धर्मों के खिलाफ कुछ बोलने लिखने की इनलोगों की औकात ही नहीं होती। इस तरह मुहिम चलाने से पूर्व सावन में भगवान शिव को दूध से अभिषेक क्यों किया जाता है जरा इसके प्रमाणित शोध की रपट को छाप देते। आप सभी को पता है कि शिव को नीलकंठ भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने समुद्र मंथन से निकले विष का पान कर लिया था। सावन में भगवान शिव को दूध चढ़ाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव का दूध से अभिषेक काफी फलदायक होता है, वे जहरीला दूध भी पी जाते हैं। इसी कारण उन्हें दूध चढ़ाया जाता है। भगवान शिव सृष्टि के कल्याण के लिए किसी भी तरह की चीज को अपने अंदर समाहित कर लेते थे, फिर वह चाहे जहर ही क्यों ना हो।
ऐसा कहा जाता है कि सावन-भादो के महीने दूध पीने से लोग बीमार होने लगे यहां तक कि बछड़े भी दूध को पचा नहीं पाते थे तो उसे फिर इतने सारे दूध का किया क्या जाय? दूध को यूँ ही फेंक भी नहीं सकते थे तब किसी ने सलाह दी कि भगवान शिव तो विषहर्ता हैं तो उन्हीं को चढ़ाया जाय। लोगों को ऐसा लगता था कि दूध शिवजी को चढ़ाने से उनका सारी बीमारियां दूर हो जाती हैं। प्राचीन वैद्यों ने भी बरसात के मौसम में दूध को जहर के रूप परिवर्तित होते प्रमाणित किया है। तो वह तब सारा दूध भगवान शिव को चढ़ा देते थे। आपको बता दें कि आयुर्वेद में ऐसा माना गया है कि मानसून में दूध और दूध से बने उत्पादों का उपयोग नहीं करना चाहिए। इस मौसम में वात रोग होने की संभावना होती है।, हम वात, पित्त और कफ असंतुलन के कारण अनेक रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं।
दरअसल मानसून के मौसम में गर्मी से सर्दी की तरफ अचानक परिवर्तन होता है, जिस कारण हमारे शरीर में वात का स्तर बढ़ता है। यही कारण है कि प्राचीन ग्रंथों में यह बताया गया है कि मानसून के महीने के दौरान भगवान शिव को दूध चढ़ाना चाहिए। इस मौसम में बारिश के कारण घास में कई कीड़े-मकोड़े होने लगते हैं, जो घास के साथ -साथ गाय-भैंसों के पेट में चले जाते हैं। जिस कारण इस मौसम में दूध हमारे लिए सही नहीं होता, वह और भी विषैला हो जाता है। इसलिए इस मौसम में शिवलिंग पर दूध चढ़ाया जाता है।
सावन के महीने में दूध का अधिक सेवन शरीर के लिए हानिकारक होता है। इस महीने में दूध इतना गरिष्ठ होता है कि इसे पचाना आसान नहीं होता। इसलिए आयुर्वेद में सावन भादो के महीने में दूध,दही,साग इत्यादि का सेवन वर्जित किया गया है। बच्चे और बुजुर्गों को अगर देना भी है तो पानी मिलाकर दूध देने की सलाह दी गयी है। सावन का महीना एक ओर जहां वर्षा और हरियाली लेकर आता है वहीं दूसरी ओर संक्रमण और बीमारियों का भी खतरा बना रहता है। इस दौरान कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण शरीर को कई बीमारियां अपना शिकार बना लेती हैं। इसलिए ऐसे मौमस में अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
आयुर्वेद में भी सावन के महीने में कुछ ऐसे विशेष आहार हैं जिनका सेवन वर्जित माना जाता है। यही नहीं हमारे शास्त्रों में भी इस महीने सात्विक भोजन करने की सलाह दी गई है। इसी वजह से इस महीने बहुत से लोग लहसुन, प्याज और मांस-मछली का सेवन छोड़ देते हैं। सावन में दूध का सेवन न करने की सलाह दी जाती है इसी बात को बताने के लिए सावन में शिव जी का दूध से अभिषेक करने की परंपरा शुरू हुई। शिवलिंग की रेडियोएक्टिव क्षमता दूध के विषैले पदार्थों को हर लेती है। वहीं अगर वैज्ञानिक तौर पर देखा जाए तो इस मौसम में दूध पीने से पित्त बढ़ता है।
यही वजह है कि पूरे सावन में लहसुन प्याज, माँस मछ्ली और दूध इत्यादि के सेवन पर रोक लगाई जाती है।
✍पंकज प्रियम
९२१. चलो चलें शिवधाम
बाबा धाम