Monday, September 2, 2019

644.नज़र नजर

हुस्न/मुक्तक
विधाता छंद
1222*4
नज़र मेरी न लग जाये, ...जरा काजल लगा लो तुम,
नज़र सबकी न चढ़ जाये, गिरा आँचल उठा लो तुम।
ग़जब ये हुस्न है तेरा, .......तुझे जब देखता हूँ मैं-
कदम मेरे बहक जाते....जरा ये दिल सँभालो तुम।।
©पंकज प्रियम
2 सितम्बर 2019

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