Friday, September 27, 2019

668.राज़ दिल का

2122 2122
आज सबकुछ बोलना है,
राज़ दिल का खोलना है।

ख़्वाब देखा जो कभी था,
आज उसको तोड़ना है।

दर्द तो होगा बहुत पर,
घाव दिल का फोड़ना है।

जख़्म गहरे हो गये जब,
प्यार को अब छोड़ना है।

ऐ प्रियम कुछ रह गया है
या अभी मुँह मोड़ना है।
©पंकज प्रियम

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