मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
चुनावी चकल्लस-8
किसान /मुक्तक उगाये खेत से सोना,.....वही किसान होता है, जमीं का चीर के सीना, जमीं पे जान बोता है। किसानों की भलाई का, करे दावा सभी नेता- लगा फाँसी अन्नदाता, भला क्यूँ प्राण खोता है।। ©पंकज प्रियम
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