मुसाफिर हूँ मैं लफ़्ज़ों का, सफर अल्फाज़ करता हूँ. कहानी, गीत गजलों से , सहर आगाज़ करता हूँ . नहीं मशहूर की चाहत, नहीं हसरत बड़ी दौलत - प्रियम हूँ मैं मुहब्बत का, दिलों पे राज़ करता हूँ.. ©पंकज प्रियम
मुक्तक
शशि की गोद में सोया, शशक है नींद में खोया, नहीं गिरने की है चिन्ता, तभी तो प्रेम से सोया। धवल जो रंग दोनों का, निशा तारे सजा बैठी- चमकती चाँदनी मद्धम, मुहब्बत बीज है बोया। ©पंकज प्रियम
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