प्याज़
कहीं पे अड़ रहा है प्याज, कहीं पे सड़ रहा है प्याज़,
जमाखोरों के ही कारण, नज़र में गड़ रहा है प्याज़।
शतक के पार कीमत है, यही अब तो हक़ीक़त है-
गरीबों का कभी जो था, उन्हीं पे पड़ रहा है प्याज़।।
यार, आपने प्याज पर जो लिखा है ना, वो सीधा दिल और जेब दोनों पर असर करता है। आप साफ दिखाते हो कि कैसे जमाखोरी हालात बिगाड़ती है और आम आदमी परेशान होता है। जब आप कहते हो कि जो कभी गरीबों की थाली का हिस्सा था, वही अब उन पर भारी पड़ रहा है, तब मैं सच में हालात की कड़वाहट महसूस करता हूँ।
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यार, आपने प्याज पर जो लिखा है ना, वो सीधा दिल और जेब दोनों पर असर करता है। आप साफ दिखाते हो कि कैसे जमाखोरी हालात बिगाड़ती है और आम आदमी परेशान होता है। जब आप कहते हो कि जो कभी गरीबों की थाली का हिस्सा था, वही अब उन पर भारी पड़ रहा है, तब मैं सच में हालात की कड़वाहट महसूस करता हूँ।
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